संवाददाता आगर मालवा : गोवर्धन कुम्भकार
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
एक ही मार्ग पर आमने-सामने आया ऐसा दृश्य
एक ओर अंतिम यात्रा, तो दूसरी ओर जनाजा
यह दृश्य सामाजिक सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं का अनकहा संदेश दे गया।
धर्म और मजहब अलग हो सकते हैं लेकिन इंसानियत
का दुख दर्द सभी रिश्तों को एक सूत्र में बांधता है।
कानड़ नगर : जिंदगी भर इंसान धर्म मजहब और परंपराओं के अलग अलग रास्तों पर चलता है, लेकिन जब जिंदगी का सफर समाप्त होता है तो मंजिल का भाव एक ही रह जाता है। रविवार को कानड़ के सारंगपुर रोड पर ऐसा ही भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने लोगों को कुछ पल के लिए ठहरकर सोचने पर मजबूर कर दिया। एक ओर मुस्लिम समाज के हबीब पठान का जनाजा सुपुर्द-ए-खाक के लिए जा रहा था, तो दूसरी ओर हिंदू समाज के देवीसिंह गुर्जर की अंतिम यात्रा अंतिम संस्कार के लिए निकल रही थी। दोनों यात्राएं जब एक ही मार्ग पर आमने-सामने आई, तो यह दृश्य सामाजिक सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं का अनकहा संदेश दे गया।
एक रास्ते पर मिलीं दो अंतिम यात्राएं-सारंगपुर रोड पर दोनों अंतिम यात्राओं का आमना-सामना होना अपने आप में भावुक कर देने वाला क्षण था। एक ओर प्रियजन को अंतिम विदाई देने के लिए लोग जनाजे के साथ चल रहे थे, वहीं दूसरी ओर गुर्जर के अंतिम संस्कार के लिए अंतिम यात्रा आगे बढ़ रही थी। दोनों यात्राओं के एक-दूसरे के सामने से गुजरने के दौरान वहां मौजूद लोगों की निगाहें इस दृश्य पर ठहर गई। जीवन के अंतिम पड़ाव पर दो अलग-अलग धर्मों की परंपराएं एक ही मार्ग पर दिखाई दीं, लेकिन दोनों के पीछे अपनो को खोने का दर्द और विदाई की भावनाएं समान थीं।







