आत्मीय बंधन आसानी से नही टूटते बल्की समय के साथ उनसे प्रेम और भी गहरे होते हैं।

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लेखिका/कवयित्री

सुश्री सरोज कंसारी

नवापारा राजिम, छत्तीसगढ़              

 

               (नया अध्याय, देहरादून)

 

                           आलेख

                           ———-

आत्मीय बंधन आसानी से नही टूटते बल्की समय के साथ उनसे प्रेम और भी गहरे होते हैं।

 

किसी की बातो में आकर हंसते- खेलते परिवार और मधुर संबंध को न तोड़े इसी में भलाई हैं।

 

बेवजह किसी का ज्यादा हस्तक्षेप रिश्तों में जहर घोलने का काम करते हैं।

 

जीवन के सफर में चलते हुए बहुत सी समस्याएं आती हैं एक इंसान की कई जिम्मेदारी होती हैं और उसे सफलता पूर्वक निभाने के लिए हमें एक दूसरे की जरूरत पड़ती हैं।जब हम किसी से मिलकर रहते हैं और आपसी सहयोग से कोई कार्य करते हैं तो कोई भी असंभव लगने वाले कार्य भी आसानी से हो जाते हैं मन शुद्ध और विचार सही होने से कई विकल्प मिलते हैं जिससे बिना किसी मानसिक थकान और दबाव के हम हर चुनौतियों का सामना करते चलते हैं अकेले रहकर हम हर काम में सफल नही हो सकतें जीवन में किसी भी रिश्ते को कमजोर और तुक्ष नही समझना आत्मीय बंधन हर मनुष्य के लिए ज़रूरी है ऐसे रिश्ते सिर्फ दिखावे के लिए नही होते आत्मा को स्पर्श करते हैं जो उदासी और आंखो की नमी को देखकर ही पढ़ लेते हैं मन की भावनाओ को समझते हैं और हर पल एक सुखद एहसास देते हैं जीवन की खूबसूरती से परिचित कराते हैं व्यक्तिव को निखारने में मदद करते है तन्हा नहीं होने देते जो सोच को एक नई दिशा देते है अनावश्यक भटकाव से बचाते हैं दुखद पल में हौसला देते है ऐसे रिश्ते उम्मीद की नई किरण बनकर आते हैं जो सौभाग्य से मिलते हैं।

 

वैसे तो दुनिया में लोगो की भीड़ हैं जहां हम खो जाते कभी- कभी घबराहट होती हैं ऐसे में हम अपने आप को अकेले बेबस महसूस करते हैं लेकिन जो दिल में होते हैं उनकी सीख हमे एक दिशा देती हैं आत्मविश्वास से भर देते हैं और सामना करने सहने और खुद की रक्षा के विभिन्न उपाएं देते हैं उनकी मधुर स्मृति साथ होती हैं ऐसे रिश्ते को कभी किसी हालात में नहीं खोना चाहिए जिनसे प्यार के रिश्ते होते हैं वे परवाह करते हैं आपके हर पल की और हर पग पर संभलने की कला देते हैं रूठने नहीं देते जिंदगी की मुसीबतों से, उनके पास बेझिझक अपनी हर बात कह सकते हैं जिन्हें देखकर होठों पर हंसी और और मन में उमंग का संचार होता वे खास होते हैं।

 

आत्मीय बंधन में रूप- रंग पद -प्रतिष्ठा शौहरत धन- दौलत मायने नहीं रखते जिसके साथ रहने से मन को खुशी मिले जिनकी बोली- भाषा व्यवहार में मिठास हो और जो हर उलझन को सुलझाने में मदद करे वो उन रिश्तों से बेहतर हैं जो साथ तो हैं लेकिन महसूस नहीं होते नाम के लिए जो अपने कहलाते हैं कभी निभाते नही तकलीफ को समझते नही दर्द को सुनते नहीं इसलिए जिनसे मन मिलता हैं वे किसी रिश्ते के नाम के मोहताज नहीं होते चाहे अमीर हो या गरीब बिना किसी भेदभाव के हर उस इंसान को महत्व देना चाहिए सम्मान करना चाहिए जो बिना स्वार्थ के आपसे जुड़े हैं कभी किसी बात के लिए मजबूर नहीं करते बदले में कुछ मांगते नहीं और किसी भी हालत में साथ नही छोड़ते जिनके साथ हैं उन्हें कभी उपेक्षित नही करना चाहिए और किसी भी रिश्ते का गलत उपयोग करने से बचना चाहिए। अपनी मर्यादा मे रहना चाहिए क्योंकि जब हम किसी को अपना मानकर उन्हें दुखी करते हैं चाहे वे कोई भी रिश्ता हो तो वे जब टूटते हैं तो फिर से जुड़ना मुश्किल होता है बनने में बहुत समय लगते है बिखेरने वालों को इस बात का अंदाजा नहीं होता इसलिए हमेशा हर किसी से वफादार रहिए। बहुत ही बदनसीब होते हैं वे जो किसी का सच्चा पाकर भी उन्हें धोखा देकर खो देते हैं। जीवन का यह सबसे दुखद क्षण होता हैं क्योंकि आज के समय में नफरत तो हर पग पर मिल जाएंगे लेकिन प्रीत की डोर हर किसी से नहीं जुड़ सकती इसलिए जो हैं उन्हे सहेजकर रखिए ये सबसे बडी जिम्मेदारी हैं।

 

जैसे हम व्यवहार करते हैं वैसी ही छवि बनती हैं जहां आपस में विचार मिलते वहां किसी प्रकार की कड़वाहट नहीं पनप सकती रिश्तें मजबूत होने चाहिए उन्हें निभाने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए एक दूसरे को अपनी शर्तो में बांधकर नही रखना चाहिए सबकी अपनी जीवन जीने की एक अलग शैली होती है उन्हें अपना स्वतंत्र विकास करने देना चाहिए पर जुड़े रहिए चाहे कैसी भी परिस्थिति हो आत्मीय बंधन नहीं टूटते बल्की समय के साथ प्रेम और भी गहरे होते हर कदम पर वे सहयोगी होते हैं गम के अंधेरे में भी वे खुशियों की जुगनू बन चमकते हैं।

 

दुश्मनी के भाव को लेकर हम स्वस्थ मानसिकता को जन्म नही दें सकते जो छल- कपट बैर ईर्ष्या द्वेष से भरे होते हैं मतलबी होते हैं जिनसे मिलकर अपनत्व न मिले साथ रहकर भी मिलनसार न हो जिनमें बनावटी पन हो ऐसे लोग जो साथ रहकर भी सहयोगी न हो जिन्हें देखकर आत्मिक खुशी न मिले जो बाते बनाने में माहिर हो ऐसे लोगो से दूर ही रहिए लेकिन उनसे कटुता पूर्ण व्यवहार न करे और न ही ऐसे लोगो के बारे में सोचें उन्हें अपने हाल में रहने दिजिए लेकिन उनके किसी दुर्व्यवहार से अपने मन को दुखी मत करिए और अपने अच्छे स्वभाव में रहिए।

 

हम अकेले ही विभिन्न क्षेत्रों में रहते हुए हर समस्या का समाधान नहीं कर सकते इसलिए हर किसी से मधुर संबंध रखिए और मिलकर कार्य करने की आदत विकसित कीजिए अपने आपको किसी से अलग दिखाने और घमंड करने की भूल मत कीजिए क्योंकि हर कोई अपनी जगह श्रेष्ठ हैं और जीने के लिए प्रेम स्नेह करुणा दया क्षमा करूणा के भाग बेहद जरूरी है इसके आभाव में हर जगह उदासी का वातावरण होता हैं।

 

हर मनुष्य के जीवन में पारिवारिक रिश्ते के आलावा ऐसे भी कई बंधन होते है जिनसे हम शारिरिक मानसिक बौद्धिक नैतिक और वैचारिक विकास के लिए किसी न किसी रूप में जुड़े होते है आर्थिक धार्मिक समाजिक राजनीतिक साहित्यिक या अन्य गतिविधियों को सक्रिय होकर करने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करते हैं जिसमें किसी महत्वपूर्ण विषय को लेकर आपसी चर्चा बैठक विचारों के आदान- प्रदान सलाह होता हैं साथ रहने कार्य करने से एक दूसरे के व्यवहार को जानने समझने का मौका मिलता हैं। सामूहिक रूप से जुड़कर ही बहुत सी बातें सीखते है अनुभव मिलते हैं साथ ही व्यक्तीगत रूप से किसी मुसीबत में होने पर मिलकर उसका सामाधान करते है इसलिए कभी भी अकेले ही रहने और सिर्फ खुद को प्रभावशाली जताने का प्रयास करना नहीं करना चाहिए साथ में रहकर कार्य से मानसिक रूप से मजबूती मिलती हैं और हम एक दूसरे के हितैषी बनते है खुलकर किसी भी विषय में बात कर पाते हैं एक पारिवारिक भाव से रहते है कई ऐसे बंधन होते हैं जिनके सानिध्य में हम प्रगति के पथ पर बढते हैं। जीवन अस्त व्यस्त नहीं होता सुव्यवस्थित होता हैं।

 

आज के समय में स्वार्थ की एक ऐसी हवा चली की किसी प्रेमपूर्ण संबंध को देखकर मन ही मन चिढ़ते हैं क्रोधित होते हैं उनसे दुखी होते हैं और उनके रिश्ते को तोडने का भरपूर प्रयास करते हैं आपस में एक दूसरे के खिलाफ़ भड़काते हैं उनकी बुराई करते हैं झूठी बातें बनाकर उनमें दूरी पैदा करते है कभी- कभी उन्हें हानि पहुंचाने के लिए उनके मधुर संबंध को तोड़ने के लिए हद भी पार कर देते हैं इतनी चालकी से वे कार्य करते हैं की पता भी नही चलने देते की वे षडयंत्र कर रहे हैं हमारे आसपास सगे- संबंधी मित्रो में एक न एक ऐसे मिल ही जाते हैं इसलिए जो सही हैं आपकी नज़र में उनके साथ जुड़े रहिए उनकी कमी को भी स्वीकार कीजिए लेकिन किसी के बहकावे में आकर रिश्ता तोड़ना नहीं चाहिए उन पर पूर्ण विश्वास रखिए किसी के कहने पर ही यकीन न करें वास्तविकता को भी जाने आज अधिकतर रिश्ते टूटने का यही कारण हैं हम किसी के कहने पर ही भरोसा कर लेते है और संदेह के घेरे में आ जाते हैं चाहे पारिवारिक समाजिक या व्यावहारिक रिश्ते हो कमजोर न हो आपस में इतना प्रेम लगाव और हो की किसी के बहकावे में न टूटे इतना मजबूत हो की आपको तोड़ने वाले हार मान के उन्हें आपके स्नेह पूर्ण रिश्ते के आगे झुकना पड़े और उनका ह्वदय भी पिघल जाए उनमें सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित हो दूषित मन पवित्र हो जाएं यही तो हैं आत्मीय बन्धन के सबसे सुखद प्रभाव।

 

जिनमें आपस में ही कटुता के भाव होते हैं एक दूसरे के प्रति जहां हर बात में कलह विवाद और बहस होते है जो किसी की समस्या को सुने बिना ही किसी को दुत्कार देते हैं शक करते हैं मिलकर किसी विषय पर चिंतन नही करते जिनमें खुलकर बात करने की क्षमता नहीं होती जो अपनो से ही हर बात छुपाते किसी के भय से ही जुड़े होते जिनमें एकता नहीं होती साथ होते हुए भी सिर्फ अपने बारे में ही सोचते है किसी के मेहनत का आदर नहीं ऐसे परिवार रिश्ते मित्रता का लोग फायदा उठाते हैं उन्हें आपस में आसानी से झगड़ा करवा देते हैं कई रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो भले ही पसंद के न हो लेकिन उनके प्रति हमारी ज़िम्मेदारी हो उनके साथ रहना जरूरी हो तो भी उन्हें निभाइये उन्हें बोझ मत समझिए। रिश्तों की दुनिया बहुत अजीब होती है हर समय हमारे अनुकूल लोग नहीं मिलते विरोधी भी मिलते है लेकिन रिश्ता हैं तो उन्हें भी साथ लेकर चलना जरुरी रिश्तों की नाजुक होती है उसे संभाल कर प्रेम से रखिए जरा सी लापरवाही और और कठोरता पाकर बिखर जाती हैं इन्हें अपनेपन से बांधकर रखना होता हैं।

 

कभी-कभी जो कुंठित विचारधारा के लोग होते हैं वे रिश्तो में दरार डालने का काम करते हैं क्योंकि उनका यहीं एक काम होता हैं किसी के आपसी बनते रिश्तों को तोड़कर उन्हें खुशी मिलती है आज वर्तमान स्थिति में हम देखते हैं कि बाहरी लोगों से अधिक संपर्क में आने के कारण आपसी संबंधों में मनमुटाव अधिक हो रहे हैं इसलिए जब भी किसी से आपके रिश्ते हो मजबूत हो अच्छे व्यवहार हो उनके प्रति निष्पक्ष निस्वार्थ रहे क्योंकि आज हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग हैं जो सिर्फ बिगाड़ने का काम करते है बनाने वाले बहुत कम ही होते हैं।

 

अपने विवेक का प्रयोग कर फैसला किजिए किसी के अंधभक्त न बने सतर्क रहिए और बिना देखे और हकीकत को जाने किसी की बातो में आकर हंसते- खेलते परिवार और रिश्ते को न तोड़े इसी में भलाई हैं नहीं तो सिर्फ पछतावा होता हैं। बाहरी व्यक्तियों से अपने मधुर संबंध को बचाकर रखिए बेवजह किसी का ज्यादा हस्तक्षेप रिश्तों में जहर घोलने का काम करते हैं।

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