सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री, लेखिका एवं शिक्षिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति
गोबरा नवापारा/राजिम, (रायपुर), छ.ग.
(नया अध्याश्र, देहरादून)
पावन पथ! (कविता)
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क्या ठिकाना इस जीवन का,
पल दो पल का मेहमान है,
आना-जाना लगा रहेगा,
यहाँ सब कुछ ढलमान है।
किस बात का अभिमान करें हम,
छोड़ यहीं सब जाना है,
गम की गठरी त्याग खुशी से,
जीवन को मुस्काना है।
मन में कोई बोझ न रखना,
जो कहना है कह डालो,
पर खुद को भीड़ से बचा लो।
साँसें ईश्वर की अमानत,
मौत न जाने कब आए,
तूफानों से पार वही जो,
मन में साहस भर जाए।
घुट-घुट कर क्या जीना,
उड़कर गगन दिखाना है,
ईर्ष्या और प्रतिशोध त्यागकर,
पावन पथ अपनाना है।
हृदय को निर्मल-स्वच्छ बनाकर रखना,
जीवन है इक छोटा सपना,
हर पल जीभर जीना।







