युगपुरुष कविवर सूर्य
सम्पादक/सृजन
(आध्यात्मिक चिन्तक एवं दार्शनिक)
(नया अध्याय, देहरादून)
“जिद की उड़ान: दुनिया से परे”
(दार्शनिक कविता)
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हौसले के पंख लगा, तू जिद की उड़ान भर,
दुनिया की बातों से न अपना जुनून कम कर।
हार और जीत तो बस मन के वहम हैं,
तू बस निर्भय होकर, कर्म के रण में उतर।
न देख दुनिया के तमाशे, यहाँ हर रंग के प्राणी हैं,
व्यर्थ की बातों में न खो, अपनी ऊर्जा और जवानी है।
जो उचित है बस वही कर, अपने पथ पर ध्यान दे,
ज़िन्दगी चलने का ही नाम है, तू बढ़कर अपनी पहचान दे।
(यह काव्य ‘कर्मयोग’ के दर्शन को दर्शाती है। व्यक्ति को बाहरी संसार की भीड़ से हटाकर, उसके स्वधर्म (उचित कार्य)व आंतरिक शक्ति (हौसला) की ओर ले जाती है।)








