संवाददाता कन्नौज (उ. प्र.): दीप सिंह
(नया अध्याय, देहरादून)
मिशन शक्ति फेज-5 : जागरूकता से आत्मविश्वास तक का सशक्त सफर
समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का अधिकार व्यवहारिक रूप से प्राप्त हो। इसी सोच को साकार करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “मिशन शक्ति फेज-5 (द्वितीय चरण)” आज महिला सशक्तिकरण का एक व्यापक जनआंदोलन बनता जा रहा है। जनपद कन्नौज में इस अभियान के अंतर्गत चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों ने महिलाओं और बालिकाओं के भीतर सुरक्षा और आत्मविश्वास की नई चेतना का संचार किया है।
पुलिस अधीक्षक कन्नौज विनोद कुमार के निर्देशन में जनपद के समस्त थाना क्षेत्रों में महिला पुलिसकर्मियों द्वारा गांवों, कस्बों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर जनचौपाल एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि महिलाओं के मन से भय और संकोच को समाप्त कर उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना रहा।
अभियान के दौरान महिलाओं और बालिकाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों, महिला सुरक्षा कानूनों, हेल्पलाइन सेवाओं तथा शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। महिला पुलिसकर्मियों ने संवादात्मक शैली में यह संदेश दिया कि प्रत्येक महिला को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में जीवन जीने का पूर्ण अधिकार है तथा पुलिस हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है।
वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए अभियान में डिजिटल सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई। महिलाओं को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया दुरुपयोग, साइबर ब्लैकमेलिंग तथा संदिग्ध लिंक से बचाव के उपाय बताए गए। यह पहल केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि महिलाओं को डिजिटल रूप से जागरूक और सतर्क नागरिक बनाने का महत्वपूर्ण प्रयास भी सिद्ध हुई।
मिशन शक्ति अभियान की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि इसने पुलिस और समाज के बीच विश्वास की दूरी को कम किया। जब महिला पुलिसकर्मी सीधे गांवों और मोहल्लों में पहुंचकर संवाद करती हैं, तो महिलाओं में सुरक्षा का भाव स्वतः मजबूत होता है। यही विश्वास किसी भी सशक्त समाज की सबसे बड़ी नींव होता है।
आज “मिशन शक्ति” केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक बन चुका है। जनपद कन्नौज में चलाया गया यह प्रयास यह संदेश देता है कि जागरूकता ही सशक्तिकरण का प्रथम कदम है, और जब समाज तथा प्रशासन मिलकर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे बढ़ते हैं, तब एक सुरक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण संभव होता है।







