सुश्री सरोज कंसारी
लेखिका, कवयित्री व शिक्षिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति,
नवापारा-राजिम, (रायपुर, छ.ग.)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
‘वर्तमान की सुंदरता!’
(कविता)
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जिंदगी मिली है तो उसे,
जिंदादिली से जीना सीखो।
राह में हैं कांटे तो क्या,
हंसकर चुभन सहना सीखो।
गम और खुशी तो,
चक्र है जीवन का।
मिले जो भी कभी,
सामंजस्य करना सीखो।
संतोष से वर्तमान को,
सुन्दरता से देखना सीखो।
कठिनाइयों से कभी न डरना,
हर परिस्थिति स्वीकार करना सीखो।
स्वार्थ, ईर्ष्या, कपट भाव को,
मन से त्याग कर।
निश्छल प्रेम भाव में,
सदा रहना सीखो।
भावहीन यह जीवन नहीं,
यह समझना सीखो।
धूप-छाँव हैं जिंदगी के रंग,
परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत सत्य है।
बदलते समय के संग,
तुम चलना सीखो।







