डा. सुधाकर आशावादी
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
व्यंग्य :
शाकाहारी व्यंजन क्यों न परोसे ?
मेजबान अपने मेहमानों की आवभगत किस प्रकार करता है, यह मेजबान की इच्छा पर निर्भर करता है। मेहमान को ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर में क्या परोसना है, यह मेजबान की सोच, समझ और मेहमानों के प्रति उसके सम्मान की भावना का परिचायक है। घर में बर्थ डे पार्टी से लेकर मैरिज एनिवर्सरी तक की पार्टी में कौन कौन से स्वादिष्ट व्यंजन परोसने हैं, यह परिवार के जिम्मेदार सदस्यों के साथ बैठकर तय किया जाता है, जिसमें किसी बाहरी व्यक्ति का कोई दखल नहीं होता।
सामान्य तथ्य भी यही है, कि विशेष मेहमान के लिए पारंपरिक व्यंजन परोसने को मेजबान प्राथमिकता देता है, ताकि मेहमान व्यंजनों का स्वाद याद रख सकें। अपने यहाँ किसी की पार्टी में जाने वाले या पार्टी का विवरण सुनकर अपनी खीज उतारने वालों की कमी नहीं है। उनकी समस्या ही यही रहती है, कि वे अपने दुःख से दुखी नहीं रहते, उन्हें दूसरों की कोई भी विशेष उपलब्धि हजम नहीं होती। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के डिनर में शाकाहारी व्यंजन परोसना उन्हें हजम नहीं हो पा रहा है। उनके हिसाब से मेहमानों को भारतीय पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन न परोस कर मांसाहारी व्यंजन परोसने चाहिए थे। उनके हिसाब से अस्सी फ़ीसदी भारतीय माँसाहारी हैं, और भारतीय माँसाहारी व्यंजन स्वादिष्ट होते हैं।
मेजबान ने अपनी पसंद के स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन बनवाए, शुरुआत में सरसों, नारियल और करी पत्ते का तड़का लगाकर स्टीम्ड बेसन रोल परोसे,मेहमानों ने केसर, किशमिश और ममरा बादाम के साथ पकाया गया हिमालयन मोरेल मशरूम और कोमल शतावरी का सेवन किया। दक्षिण भारतीय मसालों, ताजे नारियल तेल में गाजर और बीन्स से बना कैरट बीन्स पोरियाल परोसा गया। टमाटर और मसालों की ग्रेवी से तैयार किया गया पनीर लबाबदार परोसा गया, बासमती चावल, पर्ल मिलेट और भारतीय मसालों के साथ तैयार पुलाव के साथ बीटरुट रायता परोसा गया। इसके बाद पुरानी दिल्ली की फ्रूट क्रीम जलेबी के साथ परोसी गई।
मेजबान से जो अच्छा बन पड़ा, मेजबान ने वह परोसा। वैसे भी भारतीय मेजबानों की विशेषता यही है, कि जब भी घर में कोई मेहमान आता है, तो वह अपनी पसंद के वह व्यंजन परोसता है जो उसे अति प्रिय हों, इस पसंद में मेहमानों से परामर्श नहीं किया जाता, इसका कारण भी स्पष्ट रहता है, कि मेहमान मेजबान के यहाँ उपलब्ध व्यंजनों की गुणवत्ता और स्वाद से परिचित नहीं होता। जो व्यंजन किसी मेहमान ने पहले से चखा न हो, उसका स्वाद तो चखकर ही अनुभव किया जा सकता है। बहरहाल ब्रिक्स सम्मेलन में मेहमानों को शाकाहारी व्यंजन परोसे गए, किसी भी दावत में भोजन करने के उपरांत मीन मेख निकालना सभ्य मेहमान को शोभा नहीं देता। किसी ने व्यंजनों में मीन मेख भी नहीं निकाली। स्वादिष्ट भारतीय व्यंजनों का रसास्वादन किया। जलेबी का न भूलने वाला स्वाद उन्हें याद रहेगा ही। फिर भी कुछ तत्व ऐसे हैं, जो कह रहे हैं, कि शाकाहारी व्यंजन क्यों परोसे। समझ नहीं आता, कि किसी की दावत में परोसे गए शुद्ध पारंपरिक व्यंजनों पर लोग सियासत क्यों करते हैं ?
(विनायक फीचर्स)






