कवि ओ.पी.कौशिक रतनपुरिहा
गौरेला-पेंड्रा
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
श्री अशोक कुमार यादव को समर्पित…
देखो ये कैसी शुभ घड़ी आयी है,
यादव भईया की अवतण दिवस आयी है,
आयी है बहारों का, खुशियों और प्यारों का
सभी को यहीं खींच लायी है,
जहां भी रहो, खुश रहो, रब से है यही दुआ,
कवियों की है जान, जिसको करें सलामी आज,
सबको है ये पता….
जीवन आनी जानी है, सबकी ये कहानी है,
आपको अवतरण दिन की है शुभकामना…
आपको है दिल से अवतरण दिन की दुआ …
देखो ये हमारे दिलों में, कई अरमान सजायें हैं,
सभी को सम्मान देते आये हैं,
यही है आपकी कलाकारी, जिसके दीवाने हम सभी यारी।
हमारी ओर से है आपको ढेरों बधाई।
हम सब गाते हैं आपकी ही दुहाई।।
प्यार से भरा केक है, जोश से भरा आपका उदबोध है।
यही है आपकी मुस्कान की भरमाई
हम सब संगवारी करते हैं दीदारी,
हो आपकी उमर हो कई बरस,
हम सब गाते हैं। खुशियाँ मनाते हैं।।
श्री अशोक यादव सर जी को जन्म दिवस की हार्दिक बधाई अऊ गाड़ा-गाड़ा जोहार……..







