मंजू अशोक राजाभोज
भंडारा (महाराष्ट्र)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
“घर-घर श्री गणेश”
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हम सब अपने घर मिट्टी के गणेश ही लाए।
ताकि पर्यावरण की सुरक्षा हम कर पाए।
नदी में न विसर्जित कर,
अपने घर के बगीचे में ही उन्हें विसर्जित कराए।
इस बात पर अमल हम खुद करें।
और लोगों को भी यही समझाए।
ताकि उन्हें कुछ दिनों के मेहमान नही,
हर पल अपने बीच हम पाए।
जब लोग है विसर्जन के लिए जाते।
अक्सर हम कई दुर्घटनाओं की खबर,
दूसरे दिन समाचार पत्रों में है पाते।
क्यों न हम एक नियम बनाए।
हम सब अपने घर मिट्टी के गणेश ही लाए।
बड़ी नही छोटी सी मूर्ति ही हम घर-घर बैठाए।
उनका विसर्जन आसानी से सभी कर पाए।
नदियों का पानी दूषित होने से हम सभी बचाएं।
ताकि पर्यावरण की सुरक्षा हम कर पाए।
हम सब अपने घर मिट्टी के ही गणेश लाए।।







