सुश्री सरोज कंसारी
(कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका)
रिपोर्टर एवं उद्घोषिका
नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
जो लम्हें प्यार के हैं, उसे ही अपने हृदय में संजो लीजिए।
: सुश्री सरोज कंसारी
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तिनका-तिनका खुशियों को सहेजिए और मग्न रहिए अपने आज में। अक्सर जब हम किसी कार्य की शुरुआत करते हैं, तो मन में बहुत से सवाल उठते हैं, क्या होगा, कैसे होगा? एक प्रकार का डर होता है। हर इंसान सफल होकर अपनी मंजिल तक जाने की चाह रखता है। लेकिन पग-पग पर कई प्रकार की चुनौतियाँ सामने खड़ी होती हैं। सांसारिक जीवन में शारीरिक-मानसिक, आर्थिक-राजनीतिक, नैतिक-चारित्रिक, व्यावसायिक-शैक्षणिक, प्राणिक-बौद्धिक स्तर पर हमें संतुलन बनाए रखना होता है। रिश्ते-नाते, मित्र, संगे-संबंधी से बंधे होते हैं। कई तरह के लोगों से सामना होता है। कहीं वैचारिक मतभेद, कहीं प्रेम-सद्भाव, अपनापन, तो कहीं नफरत-बैर और दुश्मनी के भाव मिलते हैं। जीवन में हम कहीं पर अकेले नहीं होते। हर जगह कई लोग, उनकी सोच, रीति-रिवाज, नियम और अपनों से बंधे होते हैं और एक तरह से द्वंद्व होता है। अलग माहौल, अनजान लोग और फिर सफर, यहीं से होकर हमें अपनी पहचान बनानी होती है। सोचिए! हम डर जाएँ, संकुचित हो जाएँ और ज्यादा तनाव लें तो कैसे जीवन का निर्वहन कर पाएँगे? ज़िंदगी तो है पर गम भी हैं। बिना मजबूत हुए जीवन को व्यवस्थित कर पाना संभव नहीं। सामना करना पड़ता है हर एक परिस्थिति का। गम और खुशी के समंदर में सदैव डूबते और निकलते हैं हम। जीवन तो है, कब किस मोड़ पर ले जाए, हमें पता नहीं? सांसारिक जीवन में वैसे भी बहुत कुछ हमें देखना-सुनना होता है।
एक भावुक हृदय विनम्र-कोमल और चिंतनशील होता है। जो किसी भी बात की गहराई में जाते हैं, वे अनमोल सीख लेकर बाहर आते हैं। सोचते हैं, मूल्यांकन करते हैं, तब शब्दों के मोती से सजाते हैं अर्थपूर्ण भावनाओं का संसार। किसी के अंतर्मन में जाना, उसे समझना, उसे पढ़ लेना इतना आसान नहीं। हम सिर्फ अंदाजा लगा सकते हैं, पर किसी के एहसास को स्पर्श सिर्फ सच्चे प्रेम से कर सकते हैं। रिश्ते में किसी भी तरह की मिलावट इंसान के मजबूत बंधन को भी बिखेर देती है। इसलिए जिनके साथ भी रहें, पूरी मानसिकता से रहिए। आधे-अधूरे मन से किसी के साथ रिश्ते निभाने का ढोंग मत कीजिए। अंतर्मन में हर पल हलचल होती है। कोई भी इंसान जिसके मन में कुछ सपने हैं, सुख की चाह है, जीवन का कोई महान उद्देश्य है, जो सभी के कल्याण भाव के लिए कुछ करना चाहते हैं, वे कभी शांत नहीं बैठते। कुछ कर लेने की बेचैनी हर पल होती है, उत्साहित-जिज्ञासु और सक्रिय होते हैं वे आगे बढ़ने के लिए कोशिश करते हैं। बिना मकसद के जीवन जीने का कोई अर्थ भी नहीं।
ईश्वर के दिए इस अनमोल मनुज तन को यूँ ही बर्बाद मत करिए। अपने हिस्से की कुछ खुशियाँ, सहयोग, दया-धर्म, दान-क्षमा, करुणा-सांत्वना, परिवार-समाज और राष्ट्र के हित में खर्च कीजिए। हम इंसान हैं, किसी से दुर्व्यवहार उचित नहीं। प्रत्येक कर्म का उद्देश्य सेवा-समर्पण, त्याग-साधना और सर्व-सुख होना चाहिए। हम सृजनशील बनें और चरित्र निर्माण में आगे बढ़ें। बम-बारूद, बंदूकें, तलवार-चाकू ये हमारे सुरक्षात्मक हथियार नहीं, बल्कि भाईचारा, समझौता-शांति और अहिंसा का सर्वत्र माहौल निर्मित करना हमारा ध्येय होना चाहिए। जब जिंदगी में बहुत सी परेशानियाँ हों और मन में निराशा का ही संचार हो, तो हर इंसान को एक तिनका सुख ही बहुत सहारा होता है। इंसान उम्र भर जितना कमाने के लिए दौड़ते-भागते हैं, उसी चाह में एक पल भी आराम नहीं मिलता। जितना हम कमाते हैं, उसे चैन से बैठकर उपयोग नहीं कर पाते। जिस जीवन में एक पल भी शांति और सुकून नहीं, उस जीवन का क्या महत्व है? असली सुख तो संतुष्ट जीवन है, लेकिन हम अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं कर पाते। जो मिला है चाहे व्यक्ति-वस्तु-स्थान, उसे संभाल नहीं सकते। उन्हें प्रेम नहीं कर सकते और भटकते रहते हैं दिन-रात पाने के लिए। दुख को पाने के बाद ही हम जीवन को समझ पाते हैं, सुख की परिभाषा। कितना भी बटोर लीजिए, यहीं रह जाना है सब, जानते हुए भी हम मानते नहीं। यही है दुख का कारण। जीवन में आराम कम और थकान बहुत है, इसलिए मन की शांति बनाए रखने की कोशिश कीजिए।
नफरत और स्वार्थ से भरे इस जीवन में एक तिनका सच्चा प्यार ही जिंदगी के हर पल को खूबसूरत बनाता है। असल में हम अधिक पाने के लिए कम को महत्व नहीं देते। छोटी-छोटी खुशियाँ ही हमें जीने के लिए प्रेरित करती हैं। हम कितनी भी कोशिश कर लें, कुछ कमी तो रह जाती है। हर दृष्टि से पूर्ण नहीं हो सकते, यह जीवन है और जिसमें हर तरह के अनुभव हमें मिलते हैं। जो है उसी के साथ दिल से जीकर देखिए, हर पल हसीन हो जाएगा। दिखावे की होड़ में हम अपनी मौलिकता खोते जा रहे हैं। जब बहुत कुछ होता है और उसे पाकर हम घमंड से भर जाते हैं, तो जीवन का आनंद नहीं ले पाते और कम में भी हम संतुष्ट होते हैं, विनम्र, सहज-सरल और हर गम भूलकर वर्तमान में ध्यान देकर जीना प्रारंभ करते हैं तो अंतर्मन खुशियों से भीग जाता है। सकारात्मक सोच के साथ हर काम कीजिए क्योंकि उदास होकर हम और भी कमजोर बनते हैं। जीने के लिए सिर्फ धन-दौलत नहीं, प्रेम की सच्ची अनुभूति, अपनों का साथ और सुकून की भी जरूरत होती है। जब हम अभाव में भी हर पल को अपना बना लेते हैं, सीख जाते हैं समझौता-संतुलन और जख्मों के साथ मुस्कुराना, फिर हारने के लिए और कुछ बाकी नहीं रहता। अपनी धुन में चलिए, अपने स्वभाव में रहिए। जीवन का आनंद अपने अनुसार लीजिए, किसी को देखकर नकल मत कीजिए।
जो लम्हें प्यार के हैं, उसे ही अपने हृदय में संजो लीजिए।
लौटकर नहीं आते जो गुजर जाते हैं पल, इसलिए जिससे आपको खुशी मिले, सब काम छोड़कर उसे अवश्य कीजिए। जीवन में कुछ नहीं, दुख-सुख आते रहेंगे, इंतजार में मत बैठिए। तिनका-तिनका खुशियों को सहेजिए और मग्न रहिए अपने आज में। जीवन में कई समस्याएँ हैं पर उसी में ध्यान मत दीजिए। ढूँढ़ लीजिए अपनी पसंद-ख्वाहिश और चाहत को। जीने की कोई वजह न हो तो हर पल तन्हा हो जाता है जीवन, जो बेहद बोझिल होता है। अपने जीवन की विविध उलझनों के बीच आनंदित पल का निर्माण आपको खुद ही करना है। हर पल को अपना बना लीजिए। औरों को भी प्यार की वजह दीजिए। नफरत से सिर्फ भावनाएँ चोटिल होती हैं।






