सुभाष आनंद
(लेखक पंजाब के वरिष्ठ पत्रकार हैं)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
बेहाल पंजाब और भ्रम में मान सरकार
पंजाब में विधानसभा चुनाव निकट हैं और सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो चले हैं। प्रदेश में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी चुनाव को लक्ष्य मानकर घोषणाओं और तोहफों की झड़ी लगा रही है। परंतु विगत चार वर्षों का लेखा-जोखा इन घोषणाओं से अधिक महत्वपूर्ण है। इस अवधि में किसानों की आत्महत्या, सरकारी कर्मचारियों की स्थिति, व्यापारियों और उद्योगपतियों की कठिनाइयां तथा मजदूरों पर हुई पुलिस कार्रवाई जैसे प्रश्न आज भी अनुत्तरित हैं। जनता की स्मृति इतनी क्षीण नहीं है, जितनी सत्ता पक्ष मान रहा है।
वर्तमान में पंजाब दोहरी चुनौती से जूझ रहा है – नशा और भ्रष्टाचार। भू-माफिया, शराब माफिया और संगठित अपराध के बढ़ते प्रभाव के आरोप लग रहे हैं। नशे की अधिक मात्रा से युवाओं की मृत्यु की घटनाएं चिंताजनक हैं। यह स्थिति कानून-व्यवस्था और सामाजिक स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर संकेत है।
दूसरी बड़ी चुनौती बिजली संकट है। प्रदेश में लंबे विद्युत कटौती से औद्योगिक उत्पादन और बाजार प्रभावित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 16 घंटे तक बिजली न रहने की शिकायतें हैं। सरप्लस बिजली के दावे और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाता है।
आर्थिक मोर्चे पर भी स्थिति उत्साहजनक नहीं है। आवश्यक वस्तुओं की मूल्यवृद्धि, कृषि संकट और बेरोजगारी ने आम जन को प्रभावित किया है। एक अनुमान के अनुसार लगभग 40 प्रतिशत किसान खेती के अतिरिक्त विकल्प तलाशने को विवश हैं। प्रदेश में नए उद्योगों का अभाव और पुराने उद्योगों का पलायन औद्योगिक नगरी लुधियाना सहित पूरे राज्य के लिए चिंता का विषय है।
मान सरकार ने सत्ता में आते ही छह मेडिकल कॉलेज खोलने का वादा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हो सका। अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, सड़कों और सीवरेज प्रणाली की जर्जर स्थिति विकास के दावों को कठघरे में खड़ा करती है। वित्तीय प्रबंधन के मोर्चे पर भी सरकार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।
आज पंजाब में कानून-व्यवस्था, नशा, बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दे जनमानस में हैं। पढ़ा-लिखा युवा भी अपराध की ओर उन्मुख हो रहा है, यह सामाजिक चिंता का विषय है। सरकार यदि केवल विज्ञापन और घोषणाओं तक सीमित रही तो दिल्ली के बाद पंजाब में भी उसे जनादेश की कसौटी पर कठिन परीक्षा देनी पड़ सकती है। पंजाब को चुटकुलों से नहीं, ठोस नीति और सुशासन से राह मिलेगी।
(विनायक फीचर्स)






