आंतरिक सुख निःस्वार्थ भाव में है

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सुश्री सरोज कंसारी

(कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका)

रिपोर्टर एवं उद्घोषिका

नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)

 

                (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

आलेख:

 आंतरिक सुख निःस्वार्थ भाव में है

 : सुश्री सरोज कंसारी

   =======================

 

        निज स्वार्थ से ऊपर उठकर जीवन का लक्ष्य महान बनाइए। किसी भी बात की गहराई में जाने से ही उसके वास्तविक स्वरूप का सही मूल्यांकन होता है। सत्य को जाने बिना मानसिकता हमेशा विचलित रहती है। सांसारिक जीवन में भटकाव बहुत हैं। हर पल एक द्वंद्व का जन्म होता है। जब हम अज्ञान के अंधकार से निकलने की कोशिश करते हैं, तभी ज्ञान का प्रकाश भीतर प्रवेश करता है। इसके लिए मन की शुद्धता जरूरी है। सत्य के साथ जीवन जीना इतना आसान नहीं, कठिन तपस्या है। बिना त्याग, समर्पण और साधना के जीवन के मूल उद्देश्य को हम नहीं पा सकते। सत्य को दिखावे की जरूरत नहीं, वह जीवन का संपूर्ण सौंदर्य है। जो जीवन की सच्चाई को समझ जाते हैं, वे सहज हो जाते हैं। कई लोग झूठ में जीवन गुजार देते हैं। मौज-मस्ती, भोग-विलास से हम अलौकिक आनंद को नहीं पा सकते। असली सुख तो अंतर्मन का विषय है, जिसे हम बाहर ढूंढते हैं। सांसारिक जीवन बस एक जिम्मेदारी है, जिसे निस्वार्थ निभाते हुए आत्म-कल्याण के लिए हमें प्रयास करना है। अपने आत्मा को परमात्मा से जोड़ देने से मन पवित्र होता है और दूषित विचार नष्ट होते हैं। क्षणिक सुख भौतिकता की चाह है, जिसके पीछे भागने से सिर्फ अशांति व्याप्त होती है। स्थायी सुख के लिए अंतर्मन में सुंदरता रखिए, एकदम शांत चित्त रहिए। सुंदर मानव चोला पाकर उसे व्यर्थ मत कीजिए। सांसारिक जीवन एक जिम्मेदारी है, जहाँ रहकर हमें निस्वार्थ कर्म करना है। अगले पल की खबर नहीं होती इस सफर में, हमें हमेशा जागरूक, सचेत, सक्रिय और ईमानदार रहकर हर पल को अपना बनाकर जीना है। जब बेवजह की बातें मस्तिष्क में घर कर लेती हैं, तो उसे निकालना कठिन होता है। स्वस्थ विचार के साथ हर कदम में आगे बढ़िए। याद रखिए! इंसान अपने कर्मों के फल भोगते ही हैं, इसलिए कोई गलत करे तो उसके अनुसार मत बनिए, अपना स्वभाव हमेशा अच्छा ही रखिए। बदले की भावना में कई जिंदगी आज बिखर गई हैं, खुद को संभालिए हर परिस्थिति में। जीवन में बहुत कुछ घटित होता है, कुछ बातें हमें अंदर ही अंदर खोखला कर देती हैं। हद से ज्यादा मत सोचिए! खुले विचार से स्वागत कीजिए जीवन की हर चुनौती का। चाहे लाख तूफान आएँ, बस आत्मविश्वास बनाकर रखिए। अपने जीवन के हर क्षण को सुखद बनाने के लिए मुस्कुराने की आदत रखिए। जहाँ मन लग जाए, वहाँ रुकिए। अपने दिल को हमेशा प्रेम भरा स्पर्श दीजिए और जिससे अनावश्यक तनाव मिले, उससे दूर ही रहिए। क्या राजा अमीर-गरीब सभी के जीने का तरीका अलग है, पर हम सबकी मंजिल मौत ही है। कोई बच नहीं सकता काल के चक्र से। इसलिए बर्बाद मत कीजिए इस अवसर को, भरपूर उपयोग कीजिए। सुकून ढूंढिए, इस भौतिकता की चकाचौंध में डूबे मत रहिए। निज स्वार्थ से ऊपर उठकर जीवन का लक्ष्य महान बनाइए। रिश्ते-नाते, सगे-संबंधी, मित्र-परिवार, समाज-राष्ट्र व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास, सुरक्षात्मक वातावरण और जीवन निर्वहन के लिए जरूरी हैं। अपने हिस्से का हर कर्तव्य बखूबी निभाइए। अपने दिल और दिमाग के बीच संतुलन सदैव बनाकर रखिए। वक्त के हाथों सभी बंधे हैं। रूप-रंग, जोश-जवानी एक क्रम है, जो बारी-बारी आएँगी और चली जाएँगी, स्वीकार कीजिए। शारीरिक-मानसिक स्थिति हमेशा बदलती रहती है, बस मन में दृढ़ता रखिए। मन को कमजोर मत बनाइए, सामंजस्य स्थापित कीजिए। कुछ पाकर ही खुश रहना है, ऐसी बात नहीं है। कभी किसी के लिए खर्च करके भी देखिए! अपना समय, सेवा, सहयोग, सुविधा किसी को देकर भी आनंदित होना सीखिए। माया का एक जाल ही तो है हमारे चारों तरफ और खुद हम उसमें उलझे हैं। सब कुछ पाने की चाह में आत्म-कल्याण करना मत भूलिए। हम सभी सिर्फ सफर में होते हैं। धन-दौलत, पद-प्रतिष्ठा, शोहरत, बंगले-गाड़ी ये सब एक आकर्षण हैं मन का। एक भ्रम है कि सब पा लेने से हम एकदम सुखी हो जाएँगे, आराम से बैठकर जीवन गुजरेंगे, पर ऐसा होता नहीं। दर्द के साथ ही चलिए, कड़वाहट भी जीवन का हिस्सा है। भागिए मत! बस हिम्मत बटोरिए, ये मंजिल नहीं, बाह्य सुख हैं। आंतरिक खुशी के लिए जीवन जीना सीखिए। मन की गहराई की कोई थाह नहीं, इसलिए अपने अंतर्मन के द्वंद्व से निकलिए। शांत होकर जीवन व्यतीत कीजिए। दुखद अवस्था से निकलिए, मन को मजबूत करिए। हम जैसे सोच लेते हैं, वैसे ही अनुभूति होती है, इसलिए सकारात्मक पहलू को देखिए और नकारात्मक बातों को भूलिए। त्याग कीजिए – कुछ जिद, पसंद और सुविधा का। ईश्वर के नियम को जानिए, जिस दिन हम विधि के विधान को समझ लेंगे, हर गम से परे हो जाएँगे। स्वतंत्र, एकाग्र और सुव्यवस्थित जीवन की ओर अग्रसर होंगे, जहाँ पर सिर्फ संतुष्टि होगी। इस संसार से नाता एक अस्थायी व्यवस्था है। उसमें अपने आप को ऐसे बनाइए कि मन के सागर में सब सुख-दुख समा सकें। अपनी शक्ति-सामर्थ्य के अनुसार जीवन व्यतीत कीजिए। उत्कृष्ट जीवनशैली अपनाइए। दुख क्या है? मन की बेचैनी, पाने की चाह, तेरे-मेरे का भाव, अनंत ख्वाहिश। हर व्यक्ति के जीने का अपना अलग अंदाज है। मनुष्य के मन की भावनाओं का बहुत महत्व होता है। किसी भी चीज को देखने-सुनने और करने के पीछे कोई न कोई सोच निर्मित होती है। हर किसी के पास सुंदर सोच, बल-बुद्धि, शक्ति-सामर्थ्य है, जिसका सही समय पर सही दिशा में प्रयास जरूरी है। भयंकर तूफान से बहुत कुछ तहस-नहस होता है, पर धीरे-धीरे समय के अनुसार फिर से सब ठीक हो जाता है। वैसे ही मनुष्य जीवन है, अचानक से समस्याएँ, दुख-तकलीफ आती हैं, उस वक्त हम सहम जाते हैं, गमगीन होते हैं, लेकिन समझौता-सामंजस्य स्थापित करने और धैर्य रखने से समस्या का समाधान भी होता है। जिंदगी और मौत के बीच हर पल एक जंग होती है। बिना किसी भय के हर बाधा को पार करने का साहस रखिए और नेक काम करते रहिए।

 

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