संवाददाता कन्नौज (उ. प्र.): दीप सिंह
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
नल की टोटी लगी, पानी नहीं आया… काजीहार में
‘हर घर नल, हर घर जल’ बना सफेद हाथी।
एक ही ग्राम पंचायत के दो गांवों में सुविधाएं, काजीहार में सड़क-पानी के लिए ग्रामीण परेशान; ग्रामीण बोले
—टोटी तो लगा दी, पानी कब आएगा?
छिबरामऊ/कन्नौज: विकासखंड छिबरामऊ की ग्राम पंचायत रौरी में विकास को लेकर एक तस्वीर ऐसी भी सामने आ रही है, जहां योजना का ढांचा तो दिखाई देता है, लेकिन उसका लाभ ग्रामीणों तक पहुंचता नजर नहीं आ रहा। ग्राम पंचायत के मजरा काजीहार में ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना के तहत घरों के बाहर टोटियां तो लगा दी गई हैं, लेकिन ग्रामीण अब भी पानी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर नल लगाने के बाद पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी कब पूरी होगी?
ग्राम पंचायत रौरी में रौरी, हसनपुर सानी और काजीहार गांव शामिल हैं। ग्रामीणों के मुताबिक तीनों गांव एक ही पंचायत का हिस्सा हैं, लेकिन विकास कार्यों की स्थिति में काफी अंतर दिखाई देता है। रौरी में इंटरलॉकिंग और सीसी रोड के साथ पेयजल व्यवस्था बेहतर होने की बात कही जा रही है। हसनपुर सानी में भी सड़क के साथ हर घर नल-हर घर जल योजना की सुविधा उपलब्ध बताई जा रही है। वहीं काजीहार में ग्रामीण आज भी सड़क, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार कर रहे हैं।
टोटी देखकर उम्मीद जगी, पानी का इंतजार खत्म नहीं हुआ
काजीहार में घरों के बाहर लगी पानी की टोटियां ग्रामीणों के लिए उम्मीद का प्रतीक बनीं, लेकिन समय बीतने के साथ यही टोटियां अब सवाल खड़े कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब योजना का काम हुआ तो लगा कि अब घर तक पानी पहुंचेगा और दूर से पानी ढोने की परेशानी खत्म होगी। लेकिन टोटी लगने के बाद भी पानी का इंतजार जारी है।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में कई सरकारी हैंडपंप भी हैं, लेकिन इनमें से कई काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में नल योजना के जरिए घर तक पानी पहुंचने की उम्मीद थी। योजना का लाभ पूरी तरह न मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
सड़क ऐसी कि पैदल निकलना भी चुनौती
पेयजल के साथ काजीहार की सबसे बड़ी समस्या गांव की गलियां और रास्ते हैं। ग्रामीणों के अनुसार कई गलियां ऐसी हैं जहां पैदल निकलना भी मुश्किल है। बरसात में कीचड़ और जलभराव परेशानी को और बढ़ा देते हैं। बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत होती है और बुजुर्गों व महिलाओं को भी रोजमर्रा के काम के लिए खराब रास्तों से गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब पंचायत के दूसरे गांवों में इंटरलॉकिंग और सीसी सड़कें बन सकती हैं तो काजीहार की गलियों का नंबर कब आएगा?
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए भी भटकने का आरोप
ग्रामीणों की शिकायत सिर्फ सड़क और पानी तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे जरूरी दस्तावेजों के लिए आवेदन करने के बाद भी उन्हें समय से प्रमाणपत्र नहीं मिल पाता। ग्रामीणों के अनुसार कई मामलों में छह महीने तक इंतजार करना पड़ता है। कई लोग बार-बार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद थककर बैठ जाते हैं।
ऐसे में सवाल यह भी है कि ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ जरूरी सरकारी सेवाओं का लाभ हासिल करने के लिए इतनी लंबी प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़ रहा है?
एक पंचायत, विकास की दो तस्वीरें
काजीहार के ग्रामीणों के आरोपों को यदि पंचायत के दूसरे गांवों से जोड़कर देखा जाए तो सवाल और गंभीर हो जाता है। रौरी में सड़क और पेयजल व्यवस्था बेहतर होने की बात कही जा रही है, हसनपुर सानी में भी सड़क और नल-जल योजना का लाभ मिलने की जानकारी है। लेकिन काजीहार में ग्रामीणों के मुताबिक बुनियादी सुविधाएं अभी भी अधूरी हैं।
ग्रामीण इसे विकास में असमानता से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत के सभी गांवों को समान रूप से विकास योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।
अब टोटी नहीं, पानी चाहिए
काजीहार के ग्रामीणों की मांग सीधी है—उन्हें योजना के नाम पर सिर्फ टोटी नहीं चाहिए, बल्कि टोटी से पानी चाहिए। उन्हें कागज पर दर्ज विकास नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला काम चाहिए। पक्की सड़क, सुचारु पेयजल व्यवस्था और समय से सरकारी प्रमाणपत्र उनकी मूल जरूरतें हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ‘हर घर नल, हर घर जल’ का असली मतलब तभी पूरा होगा, जब नल में पानी भी आए। सिर्फ टोटी लगा देने से योजना का उद्देश्य पूरा नहीं होता।
अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग और ग्राम पंचायत स्तर के जिम्मेदार लोग ग्रामीणों की शिकायतों का संज्ञान लेकर काजीहार में पेयजल और सड़क की समस्याओं का समाधान कब तक कराते हैं। फिलहाल काजीहार में लगी पानी की टोटियां ग्रामीणों के लिए सुविधा से ज्यादा एक सवाल बनती जा रही हैं—“टोटी तो लगा दी, पानी कब आएगा?”






