हर कड़वाहट को भूलकर जीवन के इस सफर का आनंद लिजिए 

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लेखिका/कवयित्री

 सुश्री सरोज कंसारी

  नवापारा राजिम, छत्तीसगढ़

 

                   (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

                      आलेख

                      ———–

             हर कड़वाहट को भूलकर जीवन के

                  इस सफर का आनंद लिजिए। 

 

अच्छे दिनों में भी हर इंसान से मिठास रखिए

                   और दिखावे से दूर रहिए।

 

अंत तो होना हैं एक दिन रूप- रंग यौवन-दौलत शौहरत

                  का फिर घमंड किसलिए?

 

मस्त रहिए अपने जीवन में औरों को भी रहने दीजिए।

 

                समय रहते हर कार्य को करने का प्रयास कीजिए सफलता-असफलता दोनो मिलते हैं जिंदगी के सफर में पर रुकिए मत कर्म पथ पर बहुत सोच समझ कर बढ़िए उचित- अनुचित का ध्यान रखते हुए किसी काम को कीजिए अपने उद्वेश्य को भूलिए मत जीवन बहुत कुछ सिखाती हैं और दिखाती भी हैं कभी किसी हालात से लड़ते हुए हार जाते हैं तो शारिरिक मानसिक कमजोरी होती है हिम्मत हार जाते है कभी प्रयास करके जीत जाते है हर पल को जीने के लिए तैयार रहिए झूठ के दामन में जिंदगी गुमनाम हो जाती हैं भय दहशत और घबराहट होती है यह सोचकर जब हकीकत का सामना होगा तो क्या होगा? कहीं पर आराम नहीं मिलता जब सच से सामना करते हैं और अंजाम को स्वीकार करते हैं तो मन में बोझ नहीं होता इसलिए कहीं सुनी बातों पर यकीन मत किजिए भूल- भूलैया होती है जिंदगी की राहें गम की भीड़ को चीरकर निकलिए अपने लिए सहारा मत ढूंढिए बस बन जाइए किसी के मददगार मजबूत रहिए।

 

            अपने आप को ऐसे बनाइए की हर हाल में मानसिक संतुलन बना रहे इसलिए पूर्व से कल्पना कर कोई कहानी मत बनाइए स्वीकार करिए वक्त के हर फैसले विधि के विधान को हम नही बदल सकते उलझिए मत स्वस्थ मानसिकता से कार्य करते रहिए कितने भी ज्ञान की बात कर ले लेकिन जब तक उसे व्यवहार में नही उतारेंगे तो सब व्यर्थ है कभी -कभी हम असमंजस की स्थिति में ही समस्या के इर्द -गिर्द घूमते रहते है सरल सहज और छोटी बात को भी अपनी नासमझी की वजह से जटिल बना लेते है जब तक हम पर कोई घटना घटित नहीं होती हम किसी को समझ नही पाते भले ही सांत्वना देते है दर्द को महसूस करने के लिए जख्म मिलना जरूरी हैं हर कोई ठोकर खाकर ही संभलने का हुनर सीखते है कहने तक ही सीमित न रहे जो सही है जिससे चरित्र का निर्माण हो उसे अनुकरण करिए मन को मनाकर रखिए वो अगर नियंत्रित हैं तो हर काम सुव्यवस्थित होते हैं उसके नाराज दुखी होने से अधिकतर खुशियों को महसूस नहीं कर पाते दृढ़ संकल्पित होकर रहिए जो गलत हैं उसे छोड़ने में ही भलाई हैं उसके लिए ज्यादा चिंता मत कीजिए ।

 

             अक्सर जीवन हम अपनी आदत के अनुसार जीते हैं उसी के अनुसार अपनी मानसिकता को बना लेते हैं अगर कभी विपरित माहौल कार्य और लोगों के साथ रहना पड़े तो सामंजस्य स्थापित करने में समस्या होती है जब तक जीवित हैं सुख-दुख दोनो का निर्वहन करना पड़ेगा इसलिए जैसी परिस्थिति निर्मित हो उसका सामना करने के लिए तैयार रहे कुछ लोग अपने आपको बिल्कुल बदलना नहीं चाहते भले से उसकी वजह से किसी को तकलीफ हो लेकिन सही समय पर सही फैसला लेना भी जरूरी है और एक ही जिद को लेकर जीवन गुजारने के आदि न बने यह तो तय है बेहद प्रिय व्यक्ति वस्तु और स्थान को भी अचानक से छोड़ना पड़ता हैं चाहते तो है अपनी पसंद के अनुसार जीना पर हर जरूरत पूरी नहीं होती कुछ छूट जाता है कुछ टूटकर बिखर जाता है और जो कुछ शेष रहता है चाहे वह अपने अनुकूल हो या न हो उसी में निर्वहन करना होता है स्वीकार करने में ही भलाई है झुकना भी जरुरी हैं कई बार नादानी और लापरवाही की वजह से हम बहुत कुछ खो देते है समय के साथ परिपक्वता आती हैं परिस्थिति से जूझते हुए अनुभव मिलते हैं सीखते हैं और व्यक्तित्व का विकास होता हैं सब कुछ व्यवस्थित और सही रूप में हमें नहीं मिलता अस्त- व्यस्त मिलते हैं उसे अपने धैर्य से रूचि से और कार्य शैली से एक सुंदर रूप देना पड़ता है अपने अनुसार बनाना पड़ता है सब कुछ हमारी ईच्छा से नहीं होता हम रिश्तों की दुनिया में रहते हैं जहां हमारी सोच पल-पल बदलती रहती है अंतर द्वंद्व होते हैं किसी रिश्ते को निभाने बनाने संवारने सुलझाने सही दिशा देने और जिम्मेदारी के चलते कई कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है।

 

          कोई जन्म से ही सब हुनर लेकर नहीं आते कुछ में जन्मजात प्रतिभा होती है पर समय के साथ अपने कर्म के अनुसार हम अपने जीवन को बनाते हैं और मेहनत लगन और अभ्यास से पाते है। कहने को तो भीड़ होती है रिश्ते-नाते सगे- संबंधी और मित्रों की लेकिन वक्त के साथ जब किसी तकलीफ में होते हैं और उनके सहयोग की जरूरत होती है तब समझ आता है असल में कितने लोग अपने है कभी अपना व्यवहार किसी के लिए गलत मत करिए जैसे है वैसे ही बने रहिए किसी के बदलने धोखा देने षडयंत्र करने जलन दुर्व्यवहार दुश्मनी से आप भी वहीं मत करिए अपनी सोच को हर हालत में सकारात्मक रखिए अक्सर जब कोई अपने लोग होते हैं जिन पर विश्वास करते हैं उनसे अपेक्षा करते हैं और वे कभी गलत करते हैं हमसे नुकसान पहुंचाते हैं तो हम अपनी मानसिकता को भी बोझिल कर लेते हैं। 

                इंसान तो है कौन कब बदल जाएं कह नहीं सकते ?पर समझ रखना जरूरी है इंसान है कुछ भी कर सकते है दूर हो सकते हैं अजनबी अजनबी से व्यवहार भी करते हैं आश्चर्य की बात नहीं इसलिए अपने ईमान को जिंदा रखिए लोग हैं कभी आपके अनुसार रहेंगे कभी खिलाफ हो जायेंगे कोई लाभ देंगे कोई नुकसान पहुंचाएंगे उसमें हैरान होने की जरूरत नहीं बस अपने काम सही करिए चाहे कोई बदले आप अपने व्यवहार मत बदलिए कोई बेवजह आपसे बैर रखे तो उनकी समस्या आप ध्यान मत दिजिए लेकिन कभी वे मुसीबत में हो और सहायता के लिए पुकारे तो पीछे मत हटिए इंसानियत का रिश्ता हर किसी से हो पर किसी पर एकदम से निर्भर न हो कोई आपके अनुसार ही रहे और कार्य करे ऐसी मानसिकता मत बनाइए।

 

           आज आधुनिकता का समय है कुछ नया करना देखना और सोचना चाहते हैं प्राचीन परंपरा को नहीं मानना चाहते उन्हें भौतिक चकाचौंध मौज- मस्ती चाहिए आवश्यकता के अनुसार ही आज आविष्कार हो रहे हैं जो लाभदायक हैं या हानिकारक हैं यह उसके उपयोग पर निर्भर हैं लेकिन आज हमारे चारों तरफ एक अपराधिक दुनिया का निर्माण हो रहा हैं कुछ सुलझे हुए लोग हैं जो संस्कारित मर्यादित संयमित और सुरक्षित माहौल के लिए प्रयासरत हैं वे युवावर्ग को परिवार समाज और राष्ट्र के लिए योग्य जिम्मेदार नागरिक बनाकर अपनी संस्कृति और सभ्यता को बचाना चाहते हैं चिंतित हैं आज की पीढी को देखकर और उनके भविष्य को सोचकर हमारे बड़े बुजुर्ग जिनके जीवन के कटु अनुभव हैं जो जी चुके हैं जिन्हें हम आज उपेक्षित कर रहे है आज अधिकतर परिवार में छोटे बच्चे युवा युवा वर्ग और अन्य सदस्य भी बुजुर्गो के पास ज्यादा देर तक बैठते नहीं उनकी बात नहीं सुनते उनके सलाह को नहीं मानते उनके मार्गदर्शन में नहीं चलते आज बड़ी -बड़ी डिग्री लेकर या ज्यादा धन-दौलत कमा लेने पर बेटे खुद को बहुत समझदार समझने लग जाते हैं घर के मुखिया बन जाते हैं और हर फैसला खुद लेते हैं  लेकिन व्यवहारिक जीवन की समस्याओं से वे परिचित नहीं हुए रहते इसलिए आज सर्वत्र बिखराव और अलगाव की स्थिति है लाखों खर्च करके अपने बच्चों को विदेश भेजते हैं और वहीं बच्चे बड़े अफसर बनकर वहीं के होकर रह जाते हैं और बुजुर्ग अवस्था में वे इंतजार करते अपने बेटे- बहू नाती- पोते की राह देखते बैठे रहते हैं जिस नाजुक मोड़ पर उन्हें अपनो की जरूरत होती उस समय में सहारा बनने की बजाए अपनी एक अलग दुनिया का निर्माण कर लेते हैं।

         आज हम बेशक तरक्की कर रहे हैं लेकिन यकीन मानिए दिल के रिश्ते आपसी स्नेह के भाव कम हो रहे चारित्र निर्माण की दिशा में हम वो माहौल नहीं बना पा रहे जिसकी आज सबसे ज्यादा जरूरत है आज हम बालमन में खूब पढ़ने और आगे चलकर बड़ा आदमी बनने नौकरी करने का जोश तो भर रहे लेकिन सच्चा सपूत और राष्ट्र का पहरेदार बनाने के लिए उस स्तर तक प्रयास नहीं कर पा रहे वास्तविक जीवन की कठिनाइयों से जूझने संघर्ष करने कठिन परिश्रम का पाठ नहीं पढ़ा पा रहे क्योंकि हम सभी की तकनीकी पर निर्भरता बढ़ी हैं आज मेहनतकश मजदूर और किसान की इज्जत नहीं करते वे आज भी मजबूर है मोहताज है हर चीज़ के लिए आज हैं डिजिटल जिंदगी जी रहे हैं पहले की तुलना में अधिक व्यस्त हैं सोशियल मिडिया प्लेटफार्म में जुड़कर न जाने कितने ही अपराधिक कार्य हो रहे इसका अंदाज स्वयं लगा लीजिए व्यवहारिक जीवन में आज बस औपचारिकता रह गया हैं तीज- त्यौहार विवाह जन्म मरण मनोरंजन गीत संगीत ज्ञान की बातें सब मोबाईल के माध्यम से अधिक प्रसारित होते हैं हकीकत में हम उसे जानने समझने की जरूरत महसूस नहीं करते जैसे किसी को अब साथ की जरूरत नहीं सबसे बड़ा साथी हमदर्द हमराज और सबसे करीब मोबाईल हैं जिसमें सब समाहित कर दिए हैं। मस्त हैं सोशियल मिडिया में क्या कर रहे किसी को पता नहीं ?और मानसिक रूप से कई तनाव के बाद भी उससे दूर नहीं हो पा रहे हैं जो सफल हुए हैं और दुनिया में प्रतिष्ठित होकर श्रेष्ठ कर्म कर मनुष्य मात्र के कल्याण में लगे हैं उसके पीछे सच्ची लगन मेहनत और समर्पण हैं। 

 

                   सोचिए ! किस दिशा में जा रहें हैं किस तरह का विकास कर रहे ? जहां हर मन में एक आंतरिक युद्ध हैं भेदभाव की लकीर है जाति- धर्म मजहब के नाम पर विवाद है परिवार में कलह कहीं लूटमार तो मिलावट, भ्रष्टचार रिश्वत खोरी देशद्रोही के भाव हैं खुले आम हत्या हो रहे डकैती बलात्कार चोरी किडनेपिंग स्वास्थ्य से खिलवाड़ बदमाशी अपराधिक गिरोह नशे में चूर लोग सामूहिक दंगे ठगी आत्महत्या की दर में बढ़ोतरी हो रहे कहां सुरक्षित हैं हम कैसे शांत होगा मन कहां पर हैं सुकुन हम सभी के लिए एक प्रश्न चिन्ह है ?

            जब किसी बात को लेकर मन छटपटाएं किसी चीज को पाने के लिए बेचैनी हो जब आसपास के वातावरण से घुटन होने लगे लोगों की कटु बातें दिल में चुभने लगे अपनो से ठोकर मिले समय का एक- एक पल मुश्किल से कटे आतंक अत्याचार झूठ बेईमानी के विरुद्ध कोई आवाज न उठाएं भूख गरीबी बेरोजगारी महंगाई अपनी चरम सीमा पर हो सुधार के लिए मन ही मन कोई विकल्प ढूंढे तब समझिए हर क्षेत्र में एक नव चिंतन शैली के निर्माण उसमे आवश्यक सुधार नए व्यवस्था और समस्त मानव के हित के लिए कार्य करने आगे आने और एकमत होने की जरूरत हैं चाहे वे कोई भी विभाग हो जिसमें षडयंत्र झूठ और चालाकी की बू आ रही हो जहां धोखेबाज आलसी निकम्मे पद पर कार्यरत हो जो किसी के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हो सिर्फ लाभ कमाने के लिए पद पर हो अपने कर्तव्य का जो उचित निर्वहन न कर रहे हो तो उन्हें सही दिशा देने उनकी जिम्मेदारी समझाने का समय आ गया पूरी तरह जांच जानकारी सच का पता लगाना और आवश्यक कार्यवाही जिम्मेदार व्यक्ति करे और जो जरूरी बदलाव हो उसे कर एक सुव्यवस्थित कार्य नियोजन करे जिससे जरूरतमंद को लाभ हो सभी सुखी हो कोई दुखी न हो।

 

                   जिंदगी कठिनाइयों से भरी हुई होती है जब हम अति में किसी से उम्मीद पालकर रखते है खुद को संभाल नहीं पाते किसी विपरित परिस्थिति में और अनंत वेदना से भर जाते हैं उस स्थिति में मन को ठहराव की जरूरत होती हैं यह ऐसी स्थिति होती हैं जब सांसारिक जीवन से मोह छुटने लगता है हम जान चुके होते हैं कि इस क्षणिक जीवन को हम जी नहीं रहे थे बस यूं ही बर्बाद कर रहे थे मन में कुविचार को भरकर बदले के भाव जलन तुलना अमीर बनने के चक्कर में शार्टकट रास्ते गलत तरीके से कमाई करने में अपनो को धोखा देने में और न जाने कितने ही ऐसे अनजाने में हम गलती करते गए और जब कहते भी हैं जब किसी चीज की अति हो जाती है तो उसका अंत होना निश्चित है वैसे ही जब हम भोग-विलास में डूबे होते हैं और अपने करीबी लोगों के साथ होते हैं तो यह जिंदगी बहुत खूबसूरत लगती है ऐसी लगता है कि यह सदैव साथ रहे लेकिन विधि के विधान को भी हम कभी-कभी मानने से इनकार कर देते हैं और भूल जाते हैं जीवन के इस व्यस्त पल से कुछ समय निकाल कर हमें आत्म संतुष्टि और शांति के लिए भी कार्य करना चाहिए। समय रहते हमें सद्व्यवहार अपनाना चाहिए क्योंकि अंत समय में सिर्फ पछतावा होता है जो आज है वहीं भाव हमेशा नही रहते एक समय के बाद थकान होती हैं उस समय सिर्फ धन दौलत की नहीं प्रेम अपनेपन सहारे सेवा करने वालों की जरूरत होती है जिसके लिए हम कभी प्रयास नहीं करते अपने घमंड में चूर होते हैं 

         समय बलवान हैं कभी भी अचानक से कोई दुखद घड़ी आ जाती हैं इसलिए अच्छे दिनो में मिठास रखिए दिखावे से दूर रहिए अपनो को निभाइए हर कड़वाहट को भूलकर जीवन के इस सफर का आनंद लिजिए अंत तो होना ही है एक दिन रूप रंग यौवन दौलत तन और शौहरत का फिर किस बात की चिंता मस्त रहिए औरों को भी रहने दीजिए।

         ____________________________________

                  

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