प्रा.डॉ. शंकर घनशामदास अंदानी
(आचार्य, सी ए.)
अहिल्या नगर, महाराष्ट्र
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
देशप्रेम — गजल
विधा – गज्जल
आ” की ध्वनि वाला काफिया और “हम” रदीफ र
दिल में लेकर देश का अरमान हम
जान भी कर देंगे इस पर कुर्बान हम
माँगता है देश हमसे प्यार बस,
देश के हित में रहें बलवान हम
माटी इसकी चंदन जैसी है हमें,
इसकी खुशबू पर सदा कुर्बान हम
तिरंगा जब आसमाँ में लहराए,
गर्व से हो जाएँगे महान हम
वीर सीमा पर खड़े हैं रात-दिन,
उनके साहस को करें सम्मान हम
जाति-मजहब छोड़कर मिलकर चलें,
एकता की बने पहचान हम
ज्ञान की रोशनी हर घर में जले,
देश का बढ़ता रहे मान हम
किसान के श्रम का रखें सम्मान हम,
उसके सपनो का बनें उत्थान हम
विश्व में भारत की गूँजे जय सदा,
देश की खातिर रहें बलिदान हम
‘शंकर’ की लेखनी का है यही पैगाम,
भारत माँ पर दिल से कुर्बान हम।





