प्रभारी सम्पादकः दिनेश शास्त्री
(नया अध्याय, देहरादून)
कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों ने भरी हुंकार,
चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा।
देहरादूनः उत्तराखण्ड कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ की प्रान्तीय कार्यकारिणी की बैठक में कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों की लम्बे समय से लम्बित विभिन्न मांगों के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि शासन स्तर से मांगों के निस्तारण की दिशा में शीघ्र सकारात्मक कार्यवाही नहीं की जाती है तो संघ द्वारा चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष राकेश सिंह नेगी ने बताया कि कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल संवर्ग प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद कर्मचारियों की कई जायज मांगें लंबे समय से लंबित हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है।
संघ की प्रमुख लम्बित मांगें
संघ द्वारा कलेक्ट्रेट ढांचे के पुनर्गठन, कलेक्ट्रेट को विशेष कार्यालय/विभाग का दर्जा प्रदान करने, कनिष्ठ सहायक एवं अन्य पदों के ग्रेड-पे में सुधार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को तहसीलदार का लिंक अधिकारी घोषित करने, नायब तहसीलदार के पदों पर पदोन्नति हेतु कलेक्ट्रेट संवर्ग से 10 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने, वरिष्ठ/मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों के रिक्त पदों को समयबद्ध रूप से भरने तथा पारस्परिक एवं निजी अनुरोध के आधार पर लम्बित स्थानान्तरण प्रकरणों का निस्तारण करने सहित विभिन्न मांगें शासन के समक्ष रखी गई हैं।
उन्होंने बताया कि आगामी 12 से 14 अक्टूबर तक काली फीती बांधकर विरोध प्रकट किया जाएगा। नेगी ने बताया कि बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार आगामी 12 से 14 अक्टूबर तक प्रदेश के समस्त कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कार्मिक काली फीती बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
इसके पश्चात 17 अक्टूबर को समस्त कलेक्ट्रेट मुख्यालयों में एक दिवसीय धरना एवं कार्य बहिष्कार किया जाएगा तथा जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा। चेतावनी दी गई है कि यदि इसके बाद भी संघ की मांगों पर अपेक्षित कार्यवाही नहीं होती है तो 31 अक्टूबर को प्रान्तीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित कर अग्रेत्तर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
संघ के प्रान्तीय महामंत्री नवीन मोहन शर्मा ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि कर्मचारियों की जायज मांगों का लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से समाधान कराना है।
संघ ने शासन एवं प्रशासन से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक एवं समयबद्ध कार्यवाही करने का अनुरोध किया है, ताकि कर्मचारियों को आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य न होना पड़े।







