सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
शासनादेश के बाद समाप्त हुआ 28 दिवसीय धरना,
एक माह में तैनाती की मांग।
स्वीकृत 15 पदों पर नियुक्ति न होने पर
फिर आंदोलन की चेतावनी।
आंदोलनकारियों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि।
ऊखीमठः प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऊखीमठ के उच्चीकरण की मांग को लेकर तहसील परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना रविवार को धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ समाप्त हो गया। शासनादेश के अनुरूप स्वीकृत पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर 28 दिनों तक चले आंदोलन के समापन से पूर्व आंदोलनकारियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को नमन किया। साथ ही आंदोलन को समर्थन देने वाले जनप्रतिनिधियों, मातृशक्ति, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय जनता का आभार व्यक्त किया।
शनिवार को मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. पारुल गोयल शासनादेश लेकर धरनास्थल पर पहुंचे थे। अधिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच हुई वार्ता में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के उच्चीकरण से संबंधित स्वीकृत 15 पदों पर नियुक्ति को लेकर चर्चा हुई। शासनादेश के अनुरूप निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्तियां सुनिश्चित करने के आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने धरना समाप्त करने का निर्णय लिया।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि धरना समाप्त होने का अर्थ मांगों से पीछे हटना नहीं है। शासनादेश के अनुसार एक माह के भीतर स्वीकृत पदों पर तैनाती सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि निर्धारित समयावधि में नियुक्तियां नहीं होती हैं तो क्षेत्रीय जनता को साथ लेकर पुनः आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण मदमहेश्वर और तुंगनाथ घाटियों सहित पूरे क्षेत्र की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। पर्वतीय क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होना जनसुरक्षा से जुड़ा विषय है।
आंदोलन के दौरान क्षेत्र की मातृशक्ति, जनप्रतिनिधियों, व्यापार मंडल, विभिन्न सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने धरनास्थल पर पहुंचकर मांग को समर्थन दिया। लगातार 28 दिनों तक चले इस आंदोलन ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया। आंदोलनकारियों ने कहा कि स्थानीय जनता को बेहतर उपचार के लिए दूरस्थ अस्पतालों की दौड़ न लगानी पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण और स्वीकृत पदों पर तैनाती अत्यंत आवश्यक है।
धरना समाप्त करते हुए आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन से मांग की कि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप निर्धारित समय में नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि आंदोलन के उद्देश्य को धरातल पर साकार किया जा सके। उन्होंने दो टूक कहा कि अब शासनादेश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रशासन की है। एक माह की समयसीमा में स्वीकृत पदों पर तैनाती नहीं होने की स्थिति में आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। इस मौके पर नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कुब्जा धर्म्वाण, संघर्ष समिति अध्यक्ष राजीव भट्ट, बसन्ती रावत, बलवन्त रावत, आनन्द सिंह रावत, प्रदीप धर्म्वाण, सरला रावत, कर्मवीर कुंवर, महावीर सिंह नेगी, नवदीप नेगी सहित विभिन्न क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि व आन्दोलनकारी मौजूद रहे।







