कवि- अनुराग बघेल
बिजराकापा खुर्द, लोरमी,
मुंगेली (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
मोर छत्तीसगढ़ भुइयाँ
जय हो! जय हो! छत्तीसगढ़ भुइयाँ।
तोर अचरा म सबला मिलय छइँहा।।
धान के कटोरा हे मोर भुइयाँ।
महानदी के परँव मँय पइयाँ।
अरपा, पैरी ह कल-कल बाजे।
महतारी के पाँव म घुँघरू साजे।।
दशहरा, दिवारी अउ छेरछेरा के तिहार।
घर-घर म बोहावय मया के धार।।
जँवारा के जोत अउ दीया मन बरथे।
खुशी के मारे मन मोर उछलथे।।
करमा, ददरिया अउ पंथी के तान।
एही तो हे मोर भुइयाँ के शान।।
बोरे-बासी के सुवाद हे बढ़िया।
सबले सुग्घर हवंय छत्तीसगढ़िया।।
सीधा-साधा इहाँ के सबो संगी जोहार।
सबके हिरदे म बसय मया अउ सत्कार।।
जियत-जागत सरग हे इहाँ के माटी।
रतनपुर, डोंगरगढ़ अउ बस्तर के घाटी।।







