दार्शनिक सूर्य जी
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
सहज होते जाओ मनुष्यों रे !
(दार्शनिक काव्य है)
मन से मत लड़ो,
इसे सहेजो
तथा
शांत करो।
अपने अंतस को समझो,
थामो और साथ लेकर चलो।
ज़ोर नहीं, सहजता अपनाओ।
यही सहजता, मनुष्यों!
तुम्हें सरल बनाएगी,
और
प्रसन्नता से जीना
सिखाती जाएगी।
(यह सूर्य जी की कविता है जो एक आध्यात्मिक विचारक-दार्शनिक-मानवतावादी, संस्कृति व सामाजिक समानता के संरक्षक हैं)







