राजकुमार कुम्भज
जवाहरमार्ग, इन्दौर
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
हठी डोनाल्ड ट्रम्प की धोखेबाजी
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रूस के साथ डीज़ल समझौते के सिलसिले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस समय वैश्विक आलोचनाओं के भारी दबाव में आ गए हैं। हठी डोनाल्ड ट्रम्प को कूटनीतिकतौर पर धोखेबाज तक बताया जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि रूसी रिफाइनरियों से हासिल होने वाला ईंधन, वैश्विक तेल-बाजार में अवश्य ही स्थिरता लाएगा, जो कि अभी ऊॅंची कीमतों की वजह से प्रभावशील बना हुआ है।
यहाँ यह देखना दिलचस्प हो सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसी माह अर्थात् नौ अक्टूबर को ऐलान किया था कि अभी तीन लाख टन, फिर नवम्बर में पाँच लाख टन और इसके तुरंत बाद दस लाख टन डीजल की आपूर्ति रूस से दुनिया के तेल-बाजारों में की जाएगी। (नहीं, दुनिया के नहीं, सिर्फ यूरोपीय तेल-बाजारों में तेल-आपूर्ति की जाएगी।)
इधर इटली की प्रधानमंत्री जार्ज़िया मैलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को घेरते हुए आरोप लगाया है कि रूस-अमेरिकी डीजल समझौता, रूस-यूक्रेन शांति-वार्ता के मध्य दोस्ताना-व्यवधान साबित होगा। दोनो देशों की ओर से एक-दूसरे के विरुद्ध ड्रोन-हमले लगातार जारी हैं। डोनाल्ड ट्रम्प दुनिया को धोखा दे रहे हैं।
जार्जिया मैलोनी के आरोपों को खारिज करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि नहीं, ऐसा नहीं है। इस रूसी-अमेरिकी डीजल समझौते से यूरोपीय तेल-बाजारों में तेल-आपूर्ति का विस्तार होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बचाव में जोर देते हुए ये भी कहा है कि इस समझौते के तहत की जाने वाली डीजल-आपूर्ति अमेरिका के लिए नहीं है।
लेकिन भारत अगर रूस से तेल की आपूर्ति करता है, तो बदले में अमेरिका की ओर से भारत पर भारी-भरकम टैरिफ थोप दिया जाता है और ये वही अमेरिका खुल्लमखुल्ला रूस से यूरोप के लिए तेल-आपूर्ति का ऐलानिया समझौता करता है, जिससे यूक्रेन में तनाव बढ़ता है।
याद रखना चाहिए कि ये रूस-अमेरिकी डीजल-आपूर्ति समझौता, रूस-यूक्रेन-युद्ध के जारी रहते हुए हुआ है। एक तरफ तो यूक्रेन को युद्ध रोक देने की खातिर शांति-वार्ता का प्रस्ताव दिया जाता है और दूसरी तरफ यूरोपीय-देशों को बिना किसी शर्म और शर्त के तेल-आपूर्ति समझौते का तोहफा दे दिया जाता है। इस दोहरेपन को क्या कहा जाए ?
भारत पर सौ फीसदी टैरिफ लगाने की अमेरिकी संसदीय-स्वीकृति पर राष्टृपति डोनाल्ड ट्रम्प हस्ताक्षर कर चुके हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना चरम-परम मित्र बताने के बावजूद डोनाल्ड ट्रम्प ने ये हरक़त की है और यही हरकत उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ दोहराई है। डोनाल्ड ट्रम्प वाकई कमाल के हठी और धोखेबाज शख्स साबित हो रहे हैं।
यूक्रेन पर रूस के ताजा हमलों के बाद जेलेंस्की ने ट्रम्प की निंदा करते हुए आरोप लगाया है कि ट्रम्प धोखेबाज हैं। रूस के ये ताजा हमले न सिर्फ अपमानजनक और निंदनीय हैं, बल्कि मानवाधिकार कानूनो के खिलाफ भी हैं। जाहिर है कि ट्रम्प, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को नापसंद करते हैं।
कहना कठिन है कि यूक्रेन पर रूस के ताजा हमलों से तेल-बाजारों की कीमतों में वृद्धि नहीं होगी?
रूस-अमेरिकी डीजल समझौते से होगा यही कि रूस-यूक्रेन के मध्य शांति-वार्ता तो प्रभावित होगी, किन्तु तेल कीमतों का विस्तार पूर्ववत ही होता रहेगा। दुनिया ये भी देखती रहेगी कि अपने लिए आठ नोबेल शांति पुरस्कारों की माँग या भीख के आकाँक्षी, बेहद शर्मनाक कुख्याति की हद तक वैधता-मुक्त त्रस्तता-आग्रही डोनाल्ड ट्रम्प, कितना अजब-गजब संधि-समझौता कर सकते हैं?
जेलेंस्की ने यूरोपीयन नेताओं को एक बार फिर असली नेता बताते हुए शिकायत दर्ज करवाई है कि अब हमें अमेरिका से पहले जैसी महत्वपूर्ण व स्तरीय गुप्तचर सूचनाएँ नहीं मिल रही हैं।
रूस-अमेरिकी डीज़ल आपूर्ति समझौता धोखा देने वाली एक नयी वास्तविकता है। इससे न तो तेल की कीमतें प्रभावित होंगी और न यूक्रेन को युद्ध-विरूद्ध शांति-वार्ता के लिए निकट ही लाया जा सकेगा।
तो क्या हठी डोनाल्ड ट्रम्प की कूटनीतिक-धोखेबाजी इसी तरह अपने रँग बदलती रहेगी और शांतिप्रिय दुनिया यथावत ठगाती रहेगी?







