कवयित्री चन्द्रमती चतुर्वेदी ‘चन्दू’ बस्ती, अयोध्या धाम
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
प्रीत हमारी पूजा होगी
प्रीत हमारी पूजा होगी, तुम मेरे भगवान रहो,
मैं बन जाऊँ राधा प्रियतम, तुम मेरे घनश्याम रहो।
क्षणिक नहीं अनुराग हमारा, जन्म-जन्म का नाता है,
मन का रिश्ता मन से जुड़कर, प्रेम सुधा बरसाता है।
खेल नहीं है प्रेम हमारा, जीवन का सम्मान है,
तेरे मेरे साथ से ही तो, मेरी अलग पहचान है।
तेरी खुशियों में खुश रहना, मेरी यही कहानी है,
तेरे मन की पीड़ा हरना, मेरी जिम्मेदारी है।
राह कठिन हो, धूप कड़ी हो, साथ नहीं छूटेगा,
सच्चे मन से बँधा हुआ यह, बंधन नहीं टूटेगा।
चाँद गगन से दूर भले हो, तारे बिखर भी जाएँ,
मेरे मन में बसी तुम्हारी, छवि न कभी मिट पाए।
रूप-सँवार समय ले जाए, यौवन ढलता जाए,
सच्चा प्रेम हृदय में रहकर, और निखरता जाए।
तन की सीमा टूटे प्रियतम, आत्मिक प्रीत न टूटे,
जन्म-जन्म के इस बंधन की, डोरी कभी न छूटे।
तेरे नाम की ज्योति जलाकर, जीवन-पथ पर चलती हूँ,
तेरे सुख की खातिर प्रियतम, हर पल दुआएँ करती हूँ।
प्रीत हमारी पूजा होगी, तुम मेरे भगवान रहो,
मैं बन जाऊँ राधा प्रियतम, तुम मेरे घनश्याम रहो।







