जितना हो सकें शक्ति का संचय कीजिए, अपनी ऊर्जा यूं ही बेवजह के तनाव में व्यर्थ मत किजिए।

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सुश्री सरोज कंसारी                                          कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका                                 नवापारा/राजिम                                                 रायपुर, (छत्तीसगढ़)

   

 

                 (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)                                              (w) 6395080071

                         आलेख                                                                  “””””””””

          जितना हो सके शक्ति का संचय कीजिए,

  अपनी ऊर्जा यूं ही बेवजह के तनाव में व्यर्थ मत किजिए।

 

                 कम समय, काम अधिक और ऊपर से सांसारिक जीवन की उलझनें। बहुत कठिन हो जाता हैं जीवन का निर्वहन, जब हम संदेह के घेरे में होते हैं। एक समय में कई जिम्मेदारियों को निभाते हुए समस्याओं से घिर जाते हैं। क्या करे और न करें इसका फैसला नहीं कर पाते ? जब विचलित होते हैं कई तरह की बातो से, तो दिमाग मे भी कोई उपाएं नहीं सूझते। वैसे तो अपनी जगह हर इंसान सर्व शक्तिमान हैं, उनमें अदम्य साहस सामर्थ्य और असंभव को संभव कर देने की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन जब सही समय पर किसी काम को नहीं करते, लापरवाही करते हैं तब कठिनाई का सामना करना पड़ता हैं। जो बिना मन, योजना के और नियम के अनुसार काम नहीं करते वे अक्सर तनाव के शिकार होते हैं। हर पल एक द्वंद होता हैं, शांत नहीं रहते। कुछ लोग अपने ही कार्य व्यवहार की वजह से बेचैन होते हैं। 

          अक्सर दूषित विचार दूसरो की नकल और अधिक ख्वाहिश पालने से भी जीवन में अशांति उत्पन्न होती हैं। हर व्यक्ति सहज- सरल और मासूमियत लेकर इस दुनिया में आते हैं। अपने कर्म, व्यवहार और मेहनत के दम पर ही सब कुछ प्राप्त करते हैं लेकिन जों परिवार, समाज राष्ट्र मित्र, पड़ोस, संगठन और अपने कार्यक्षेत्र के मर्यादा का उलंघन करते हैं, सुनते नहीं बस सुनाते हैं। करते नहीं, बस बाधा पहुंचाते हैं। जिन्हें हर पल शिकायत ही रहती हैं। जो बुराई देखने और बताने में समय व्यतीत करते हैं ऐसे व्यक्ति अपने हाथों से अपने वर्तमान और भविष्य से खिलवाड़ करते हैं। अगर हम अपने काम पर ही ध्यान देते हैं बेवजह की बातों को महत्व नहीं देते तो अनावश्यक भटकने से बच जाते हैं और मंजिल तक आसानी से पहुंच पाते हैं। किसी को नुकसान न पहुंचाए और औरों को भी एक सुखद वातावरण देने में सहयोग करे तो जीवन का हर लम्हा खूबसूरत बन जाएं। ज्यादा बेवजह दिमाग लगाने चालाकी करने और खुद को अच्छा ही साबित करने के चक्कर में हम अपने अस्तित्व को भी भूल जाते हैं। इसलिए हम जैसे हैं वैसे ही दिखे, जैसे हैं दिखे तभी जिंदगी सरल हो पाएंगी।

            यह दुनिया बहुत बड़ी हैं हुनर, योग्यता और ज्ञान से परिपूर्ण न जाने कितने ही लोग हैं कितने ही लोग हैं जिन्हें हम जानते भी नहीं पर कोई किसी से कम नहीं हर इंसान अपनी जगह बहुत ही बेहतर हैं। हम जहां भी हैं जिस कार्य के लिए हैं बस वहीं अपनी पूरी मानसिकता लगा दिजिए मिलकर रहे ईमानदार रहकर अपने कर्त्तव्य का निर्वहन प्रमुखता से करें। हर किसी की जिंदगी में दर्द पीड़ा तकलीफ सिसकी कराह और परेशानियां है कोशी करे हम जाने अंजाने में किसी को चोंट न पहुंचाए।

      सूर्य से तेज, पर्वत से दृढ़ता, चंद्रमा के जैसे शीतल, और धरा सी धीर रहने का गुण हर मानव को खुद में विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए। सोच का हमारे जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है जब हम जीने के लिए नियम कानून मर्यादा संस्कार सभ्यता संस्कृति को मानते हैं उसे अपने जीवन में अनुकरण करते हैं तो शांत और सुखी रहते हैं लेकिन आवेश में आकर बिना सोचे जो कार्य करते हैं उससे हानिकारक परीणाम ही मिलते हैं। घिसना-पिटना, तपना और जरूरत में पिघलना बेहद ज़रूरी हैं। कठोर होकर संवेदनशील हो जानें से मन में कड़वाहट भरे रह जाते हैं। मिठास पाने के लिए हमें आपसी समझौता सामंजस्य व्यवहार कुशल होना ज़रूरी हैं। नाजुक बन सिर्फ सुख के पालने में झूलने का ख्वाब त्याग दिजिए जीवन की हर पग की चुनौतियों का। सामना करने के लिए त्याग सेवा समर्पण और संघर्ष की राह पर चलना जरुरी हैं। 

         जीवन का कोई भी क्षेत्र हो जब तक हम आपसी भेद को भूलकर समाधान का हिस्सा नहीं बनेगे अव्यवस्था में सुधार नहीं हो सकता समस्या और शिकायत की गिनती करते रहने और दोष देने से कोई महान कार्य नहीं होते सबसे पहले कदम बढ़ाइए साथ लेकर चलिए एक दूसरे का मनोबल बढ़ाइए और फिर जो सुधार करना चाहते है उसमें ध्यान लगाइए कहने वालों की कमी नहीं बस करने वालो की जरूरत हैं। नाराज उदास होकर बैठिए मत जो चाहते हैं उसे कर दिखाइए। जब तक विचारों का आदान प्रदान नही होंगे गलतफहमी बनी रहेगी इसलिए विवाद बहस झगड़े करने की बजाएं आत्मिय संबंध बनाएं रखना जरूरी हैं। जो है जैसे हैं जिस जगह हैं उससे भागने रूठने की बजाएं कुछ करने की कोशिश तो किजिए।

            जीवन में सब कुछ नहीं मिलता ये सच हैं पर जो है उसके साथ हम हर पल को बेहतर बना सकते है।बशर्ते हममें जो असीमित ऊर्जा है उससे खुद को शक्तिशाली ज्ञानी हिम्मती बनाने के लिए खर्च करें।बेवजह के खयाल करना, रोना दुखी होना सोचना, अफसोस करना, दूसरी को हानि पहुंचाना घुटना, इससे तन और मन दोनो कमजोर होते हैं।

              धन- बल, शौहरत, पद- प्रतिष्ठा से संपन्न होना यह शक्ति का स्रोत नहीं इससे आंतरिक खुशियां नहीं बटोरी जा सकती। काम- क्रोध, मद- माया, ईर्ष्या- द्वेष, छल- कपट, झूठ- बेईमानी और भ्रष्ट आचरण से दूर रहकर जब हम दिल में प्रेम, सकारात्मक सोच और हर कदम पर खुद पर विश्वास रख उत्साह से भरपूर होते हैं। जरा सी बात पर टूटते नहीं बल्की जुड़ने का भाव रखते हैं। कदम डगमगाते नहीं मुसीबत देखकर सामना करने के लिए आगे आते हैं, वही सबसे बड़ी शक्ति होती हैं। इसलिए मन को शक्तिशाली बनाइए और अपनी असीम ऊर्जा को व्यर्थ मत कीजिए। सही काम में, सही जगह मानवता के हित में उपयोग किजिए।

      

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