अदिती कुशवाहा बैकुण्ठपुर (कोरिया) छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
ये खून का रिश्ता है, पानी बन सकता नहीं………
आँखों में चश्मा है, दूर का दिखता नहीं,
ये खून का रिश्ता है, कभी बदल सकता नहीं।
तू मुझे अपना कहने से थकता नहीं,
मैं पिता हूँ तेरा, ये रिश्ता कभी मिट सकता नहीं।
बात अलग है कि तू समझता नहीं,
ये खून का रिश्ता है, पानी बन सकता नहीं।
गंदा है तालाब, तो इसमें मछली का क्या कसूर?
मैं सोचता हूँ घंटों,
वक़्त तेरे पास नहीं,
तो इसमें मेरा क्या कसूर?
मैं जानता हूँ,
दिया मैंने सब कुछ तुझे,
अपनी रूह को तड़पाकर,
पर तू लौटाएगा नहीं वापस मुझे।
वह खुशियाँ जो अब तक मैंने तुझको दिया,
अरे, बाप की कभी फटी कमीज भी देख लेता,
तो वह चार वक़्त की रोटी भी याद कर लेता,
जिसे मैं तेरे लिए खून-पसीने एक करके भी
पहला निवाला भी तुझे ही खिलाया था।
बात अलग है, मैंने कभी जताया नहीं,
भटक न जाए ज़िंदगी में कभी,
इसलिए ज़्यादा प्यार लुटाते कभी दिखाया नहीं।
बाप हूँ न, इसलिए व्यवहार में थोड़ा सख़्ती दिखाया था।
तू चाहे कर ले नफरत जितनी मुझसे,
बचपन में पहला प्यार तो तुमने मुझसे ही किया था।
तेरी कितनी गलतियों को मैंने माफ़ भी किया था।
क्यों बरसता है मुझ पर, मेरे आँसुओं को देखकर?
याद तो है ना तुझे, बचपन में कई दफ़ा
तेरे आँसुओं को पोंछकर तुझे हँसाया था।
एक पल सोचता हूँ,
आज घर के अंदर हूँ,
कल खुद के घर से ही बाहर कर दिया जाऊँगा।
आज वक़्त नहीं है तेरे पास,
पास बैठकर समय बिताने के लिए,
तो कल कहीं सड़कों पर नज़र आऊँगा।
तू अपना है ना, फिर भी तुझे गुनहगार नहीं ठहराऊँगा।
आख़िरी साँसों तक मैं अपना रिश्ता निभाऊँगा
बस डर है मुझे उसे कई समय की
खून के रिश्ते में कितना पानी है,
ये तो वक़्त ही बताएगा।
तू संभल जा, बेटा, वरना
परिवर्तन का यह दौर
फिर कभी न कभी जरूर आएगा।
आँखों में आँसू मेरे हैं,
पर तू चिल्लाएगा,
तू बेटा नहीं, खुदगर्ज कहलाएगा।





