सुहागिनों के करवाचौथ का व्रत आज पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री

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संवाददाता छत्तीसगढ़ः सुश्री सरोज कंसारी                                                                                       

 

                    (नया अध्याय, छत्तीसगढ़)                                               (w) 6395080071

 

सुहागिनों के करवाचौथ का व्रत आज पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री

चन्द्रोदय रात्रि 8.13 बजे

 

 

             नवापारा राजिम: पति के सुख, सौभाग्य व उत्तम स्वास्थ्य के लिए किया जाने वाला अखंड सुहाग का प्रतिमान करवा चौथ का व्रत भारतीय स्त्रियों के लिए बड़ा ही महत्व रखता है इस दिन विवाहित स्त्रियां भगवान रजनीश चंद्रमा को रात्रि के समय चंद्रोदय के समय अर्घ्य अर्पित करके अपने व्रत का पारणा करती है नगर के ज्योतिष भूषण पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि भारतीय सनातनी संस्कृति में कार्तिक मास का बड़ा महत्व है, इस महीने व्रत पर्वों की एक श्रृंखला ही शुरू हो जाती है, इसकी शुरूआत आज करवा चौथ के व्रत से हो रही है,सुहागिन स्त्रियों द्वारा दिनभर निर्जला व्रत रखकर पति के लिए किया जाने वाला यह पर्व भारतीय संस्कृति में स्त्री के सतीत्व एवं पति व्रत धर्म निभाने के लिए प्रसिद्ध है,इस दिन चंद्र देव की तो पूजा होती ही है साथ ही शिव पार्वती का भी पूजन किया जाता है शास्त्रों में कथा आती है की शैलपुत्री पार्वती ने कठोर तप करके भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त किया था उनका सौभाग्य अखंड है इसी अखंड सुहाग की प्राप्ति के लिए गौरी पूजन कुंवारी कन्याओं और विवाहित स्त्रियों दोनों के द्वारा किया जाता है उन्होंने कहा कि यह पर्व पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण ,परस्पर जुड़ाव ,परस्पर प्रतियोगिता और प्रेम करने का अनूठा पर्व हैइसका अपना सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व भी है आज के परिवेश में जबकि संस्कार एवं मर्यादाएं खंडित हो रही है तब इस व्रत की महिमा और भी बढ़ जाती है ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि शुक्र का तारा जो पिछले 15 अक्टूबर को अस्त हुआ था वह बुधवार 28 अक्टूबर को पूर्व दिशा में उदित हो चुका है शुक्र को भोग एवं ऐश्वर्य का प्रदाता माना जाता है और दांपत्य जीवन में भोग और ऐश्वर्यका अपना आनंद है आज रात्रि को पूर्व दिशा में चंद्रोदय 8:13 मिनट पर होगा सुहागिन स्त्रियां चांद देख कर, उसकी पूजा करके, उसे अर्घ्य देकर अपने पति के हाथों से जल ग्रहण करके अपने व्रत का पारणा करेंगी, भारतीय संस्कृति में पति को परमेश्वर मानकर पूजा जाता है, विवाह हमारे यहां सात जन्मों का अटूट बंधन माना जाता है, इसीलिये यह एक अनुबंध नहीं है और धर्म शास्त्रों में विवाह विच्छेद या तलाक का कोई प्रावधान ही नहीं है, सामाजिक तानें बाने को मजबती देने वाला हमारा दांपत्य जीवन एक आदर्श सामाजिक व्यवस्था है जो हमारी भारतीय संस्कृति को महान बनाता है।

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