“जीवन के तूफान हमें तोड़ने नहीं, बल्कि हमारे वास्तविक सामर्थ्य का अहसास कराने आते हैं।”     

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सुश्री सरोज कंसारी                                              लेखिका एवं कवयित्री                                          नवापारा राजिम,                                                  रायपुर (छ. ग)

 

                    (नया अध्याय, उत्तराखण्ड                                              (w) 6395080071

                               आलेख                   

             “जीवन के तूफान हमें तोड़ने नहीं,                                     बल्कि हमारे वास्तविक सामर्थ्य का                                     अहसास कराने आते हैं।”                                                     – सुश्री सरोज कंसारी                                                           ————–                                                                            ***************

 

 

        जीवन में कुछ आँधियाँ आती हैं, और भविष्य में भी आएँगी; परन्तु ये आपदाएँ हमें कमज़ोर करने नहीं, बल्कि हमारी अंतर्निहित शक्ति और हमारे वास्तविक सामर्थ्य का बोध कराने आती हैं। ये हमें याद दिलाती हैं कि हम इन चुनौतियों से कहीं अधिक शक्तिशाली हैं। आगत की चिंता नहीं, वरन् उसके प्रति उत्सुकता हो। जो बीत गया, उसे विस्मृत कर नवीन अध्याय का आरम्भ करना, केवल सैद्धांतिक है…संवेदनाशील हृदय में परिस्थिति अनुसार भावनाएँ उमड़ती हैं; मन अस्थिर है, प्रतिपल नव-विचार जन्म लेते हैं। जीवन के द्वंद्वों से थककर जब अंतर्मन में उतरते हैं, तो भावुकता घेर लेती है। सुख के दिवस तो सहज ही हर्षोल्लास में कट जाते हैं। जैसे ही मनुष्य के पास कोई तकलीफ आती है, किसी तरह से मानसिक, आर्थिक और शारीरिक रूप से दुखी होते हैं। लगातार किसी न किसी बातों का दर्द महसूस होता है। तब भीतर से हम बहुत अकेलापन महसूस करते हैं। समस्याओं से ग्रसित मनुष्य हमेशा अपने करीबी जनों का साथ चाहतें हैं…समय के साथ लोग मिलते हैं, एक समय के बाद बिछड़ जाते हैं। कभी-कभी हालात ही ऐसे हो जाते हैं कि हम अपने वर्तमान से दूर जाना चाहते हैं, एक तरह से घुटन का अनुभव करते हैं। निरंतर संघर्ष और जीवन से कड़वाहट मिलने के कारण मन शोक संताप से भर जाता है और जो पीछे छूट गया उन लम्हों को याद कर खो जाते हैं। जहां मनुष्य को प्रेम, स्नेह और आत्मीयता का सुरक्षा मिलता है…वहीं उनका शीश श्रद्धा से झुक जाता है। ऐसे ही अतीत में बहुत कुछ होता है जिसे हम याद कर हमारी आंखे नम हो जाती है। जब एकांत में सोचते हैं तो ऐसे लगता है जीवन जीने की कई वजह थी उन गुजरे पलों में,जहां से हम बहुत आगे निकल आए हैं। कभी-कभी ऐसा लगता है, जो गुजर गया, वो सब फिर से मिल जाएं; जहां उम्मीद और उत्साह,सपने और इंतज़ार होता था। जहां वास्तव में हम हर पल को भरपूर जीते थे। हम जानते हैं कि जो बीत गया वो पल…यह लौटकर नहीं आएंगे कभी भी…परन्तु, उन्हें याद कर एक नई ताजगी मिलती है। हम सुखद अनुभूति कर पाते हैं ,यही कारण है कि हम चाहकर भी यादों से पूरी तरह दूर नहीं हो पाते हैं। यादों के साथ ही हम हर पल रहते हैं। बहुत मुश्किल होता है उस वक्त को काटना…जब हमारे पास सोचने, कहने और जानने के लिए कोई उत्सुकता नहीं होती है। मजबूत इंसान भी कभी-कभी हार मान जाते हैं, अंदर से टूट जाते हैं। इंसान भीड़ में सब कुछ सहज हो, ऐसी कोशिश भले ही कर लें परन्तु…एकांत में उन करीबी जनों के मधुर, सुखद बातों व उनके द्वारा प्राप्त सम्मान और आत्मीयता को याद करते हैं। जीवन के कुछ पल बहुत खूबसूरत होते हैं, जिसे याद करते ही मायूस चेहरे पर खुशियाँ लौट आती हैं। जीवन में जब अच्छे लोग हमारे दिल में जगह बना लेते हैं, उनके साथ ही जीवन का हर पल जुड़ा होता है। हम यादों से पूर्ण रूप से मुक्त नहीं रह पाते हैं। कुछ लोग जीवन का हिस्स होते हैं, जिनके न होने से ज़िन्दगी वीरान होने लगती है। अच्छी यादों के सहारे ही हम दुखद स्थिति का सामना कर पाते हैं। दुखद बातें भी कभी पीछा नहीं छोड़ती हैं। कभी-कभी हम उन बातों को जब भी हम याद करते हैं जब हम मानसिक तनाव से गुजरे हुए अभाव रहे हैं। अकेले ही संघर्ष से पूरी तरह मन में थकान हो गया हो। अच्छी यादें हमें हर पल ऊर्जा देती है। वैसे भी जीवन में दुख की अधिकता और खुशियों की कमी होती है…इसलिए हर पल को आनंदित बनाने की कोशिश निरंतर किजिए। मुस्कुराने की वजह खोजें…अपनो के संग, प्यार भरा हर लम्हा होना चाहिए। एक दिन तो सब मिट जाना है, यहाँ कुछ बाकी न रहेगा…इस क्षणभंगुर जीवन के प्रत्येक क्षण को ऐसे जीयो…कि हर पल यादगार रहें। जीवन के सफ़र में बहुत कुछ घटित होता है जिससे हम महसूस तो बहुत करते हैं,परन्तु व्यक्त नहीं कर पाते हैं। जब हम बहुत कुछ सोचकर नि:शब्द हो जाते हैं,तब अंदर ही अंदर घुटन होती है। जिससे जीवन के प्रति हमें नाराजगी होती है और क्रोध बढ़ते हैं और चिड़चिड़ापन होता है। हर किसी से हम खुलकर अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर सकते हैं…परन्तु, कुछ होते हैं जिन पर विश्वास होता है उनसे हम खुलकर अपनी बात कह सकते हैं। आपस में विचारों के आदान-प्रदान से नए अनुभव मिलते हैं…और समस्याओं के समाधान होते हैं। आत्मीय रिश्ते हमें मानसिक रूप से मजबूती देते हैं। परन्तु, प्रेमपूर्ण रिश्ते के लिए, एक-दूसरे से निस्वार्थ भाव से जुड़ना आवश्यक होता है। आने वाला कल हमारा है; जीवन में अभी सुखद समय का आना शेष है। समय की प्रकृति स्थिर नहीं होती—यह हँसाएगा, रुलाएगा, और निरंतर प्रवाहित होते हुए जीवन का गूढ़ ज्ञान सिखाकर आगे बढ़ जाएगा। सबका हो कल्याण।

 

“नारी शक्ति, अस्मिता की एक सशक्त प्रतीक”

          

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