हिंदी दिवस पखवाड़े में काशी साहित्यिक संस्थान करेगी विभिन्न पुस्तकों का विमोचन।

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सम्पादक वाराणसी (उ. प्र.)   पंकज सीबी मिश्रा 

हिंदी दिवस पखवाड़े में काशी साहित्यिक संस्थान करेगी विभिन्न पुस्तकों का विमोचन।

वाराणसी : महादेव की नगरी काशी में हिंदी दिवस पखवाड़े में साहित्यिक गतिविधियों तेज हो गई है। मुंशी प्रेमचंद सरिखे दिग्गज साहित्यकारों की भूमि वाराणसी में काशी साहित्यिक संस्थान ट्रस्ट साहित्य सम्मान और पुस्तक विमोचन आयोजित करने जा रहा। यह जानकारी ट्रस्ट से जुड़ी साहित्यकारा सुनीता जौहरी ने प्रदेश के मिडिया विश्लेषक एवं जनपद के पत्रकार पंकज सीबी मिश्रा को देते हुए बताया कि काशी साहित्यिक संस्थान ट्रस्ट का तृतीय वार्षिक उत्सव आयोजन 18 सितंबर को पराड़कर भवन वाराणसी में आयोजित किया जा रहा है ,जिसमें देश के कोने-कोने से रचनाकार अपनी उपस्थिति देने आयेंगे। इस कार्यक्रम में सुनीता जौहरी की पुस्तक स्त्री का लोकार्पण होगा, जिसमें उन्होंने स्त्री कौन है, स्त्री की परिभाषा क्या है ! इन सबका वर्णन पुराणों में क्या है , समाज में तथा साहित्य के द्वारा स्त्री विमर्श में क्या बताया जा रहा है यह सब पढ़ने को मिलेगा । उक्त अवसर पर ममता तिवारी की पुस्तक नील नलीनी का विमोचन भी किया जाएगा जिसका प्रकाशन जौहरी पब्लिशर के माध्यम से हुआ है। यह पुस्तक एक खंड काव्य है जिसमें मानवछंद पर आधारित 1011 पदों का समावेश है। इस पुस्तक में प्रेम, समर्पण व त्याग को दर्शाया गया है जो पढ़ने में काफी रूचिकर है तथा यह पुस्तक हमें नील नलीनी पात्र के एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। साथ ही मंजू गुप्ता कछावा की दो पुस्तक अपने घर की ओर तथा अपनी तलाश में जो गजल संग्रह है का विमोचन किया जाएगा। मंजू गुप्ता कछावा द्वारा लिखी गई गजलों में हिंदी भाषा का आधिकाधिक उपयोग किया गया है तथा उनकी रचनाएं मुख्यतः स्व जगजीत सिंह वह चित्रा सिंह के गायन शैली से प्रभावित होकर है तथा साथ ही अनिकेत रंजन की पिता नामक पुस्तक का विमोचन भी किया जाना है। इस समारोह में साहित्य सम्मान प्रदान किए जाने के साथ ही साथ गजल सिंगर मंजू का गजल गायन होगा, जिसमें वह अपने साथी कलाकार राम के साथ अपनी प्रस्तुति देंगी। हास्य बाल कवि मयंक सेठ वाराणसी को भी आमंत्रित किया गया है जो हास्य व्यंग्य रचना से भरपूर रचना से लोगों का मनोरंजन करेंगे । कार्यक्रम की आयोजनकर्ता सुनीता जौहरी ने कहा कि जो भी लोक कलाकार अपनी इच्छा अनुसार अपनी प्रस्तुति देना चाहते हैं उनका भी मंच स्वागत करता है। सभी अतिथियों का स्वागत है। काशी साहित्यिक संस्थान मंच लोक संस्कृति व हिंदी भाषा के लिए सदैव समर्पित रहा है।

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