मैं सच बताऊँ तो कश्मीरी पंडितों बल्कि हिंदुओं को ही समझ नहीं पाया हूँ…जो हिन्दू को लात मरता है, हिन्दू उसे ही सम्मान देता है… जो हिन्दू को लतियाता है… हिन्दूजन उसके चरण चुम्बन को तैयार रहता है… अपना आत्मसम्मान तक गिरवी रख देता है…

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संवाददाता कानपुरः अवधेश प्रताप सिंह                                              

 

                      (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)                                              (w) 6395080071

 

मैं सच बताऊँ तो कश्मीरी पंडितों बल्कि हिंदुओं को ही समझ नहीं पाया हूँ…जो हिन्दू को लात मरता है, हिन्दू उसे ही सम्मान देता है… जो हिन्दू को लतियाता है… हिन्दूजन उसके चरण चुम्बन को तैयार रहता है… अपना आत्मसम्मान तक गिरवी रख देता है…

 

                    यासीन मलिक जैसा कश्मीरी पंडितों का दुर्दांत हत्यारा… जब दिल्ली आता था तो अक्सर एक कश्मीरी पंडित जो प्रोफेसर था, के निवास पर रुकता था, प्रोफेसर साहब का परिवार उसे ‘अपने बेटे’ जैसा सम्मान देता था ! एक कश्मीरी मुस्लिम शायर हैं, उनकी वाल पर वाह… वाह…आह…आह करने वाले कश्मीरी पंडित खूब होते हैं… जस्टिस काटजू के घर पर विजिट करने वाले कम ही होते हैं… मगर जब कोई कश्मीरी मुस्लिम उनके घर पहुँचता है तो उनका कश्मीर प्रेम उरूज पर पहुंच जाता है !

 

      देश में कौन नहीं जानता कि कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा, पलायन और सैकड़ों हत्याओं का उत्तरदायी अब्दुल्ला परिवार है… निधि राजदान को सब ज्ञात है,2019 का ट्वीट देख लीजिए… मगर कश्मीरी पंडित निधि राजदान ने दूझिया उमर अब्दुल्ला को चुन लिया ! बरखा दत्त जो एक पाकिस्तान से पलायित परिवार से हैं, उसने भी अपना निकाह हसीब द्राबू, एक कश्मीरी मुस्लिम राजनीतिज्ञ से किया है…

 

             हम सैकड़ों वर्षों के दमन और अत्याचारों झेलने के बाबजूद अपना अस्तित्व बचाये हुए हैं… मगर हमें अपने हिन्दू होने पर गर्व क्यों नहीं होता ? हम अपने दुश्मन से Validity और स्वीकार्यता क्यों चाहिए ? 

 

“इतिहास की गहराइयाँ हों या आज की राजनीति, सच को बेबाकी से कहना ही मेरी पहचान है”। अगर आप भी तथ्यों और निष्पक्ष विश्लेषण के साथ जुड़ना चाहते हैं, तो इस सफर का हिस्सा बने।

 

ऐसे ही और बेबाक विचारों के लिए मुझे फॉलो करें और अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।

 

            *************************

 

कहाँ गए दोगले हिंदुओं…? कहाँ छिपकर बैठे हो…?

 

अरे! जब कोई कॉमेडियन कॉमेडी के नाम पर माता सीता का मज़ाक बनाता है, तब कहाँ जाते हो?

जब प्रभु श्रीराम का पुतला जलाया जाता है, तब कहाँ जाते हो?

जब धर्मविरोधी तुम्हारे धर्म पर प्रहार करते हैं, तब कहाँ जाते हो?

जब तुम्हारी आस्था को अंधविश्वास बताया जाता है, तब कहाँ जाते हो?

जब धर्म के नाम पर हिंसा की धमकियाँ दी जाती हैं, तब कहाँ जाते हो?

जब लव जिहाद जैसे गंभीर मुद्दों पर आवाज़ उठती है, तब कहाँ जाते हो?

जब नेता तुम्हें जातियों में बाँटकर तुम्हारी एकता तोड़ते हैं, तब कहाँ जाते हो?

 

                और आज एक युवा संत निकल पड़े हैं हिंदुओं को एक करने के लिए, जात-पात और ऊँच-नीच की दीवारें मिटाने के लिए। दिन-रात सनातन धर्म और समाज की सेवा में लगे हुए हैं। उनके समर्थक मानते हैं कि उन्होंने सनातन की आवाज को देश-विदेश तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है।

 

        लेकिन अफसोस! कुछ लोग उनकी बातों को बिना पूरा संदर्भ समझे, उनका अर्थ का अनर्थ बनाकर विवाद खड़ा करने लगते हैं।

 

             प्रसिद्ध होने और वायरल होने के बहुत से रास्ते हैं, लेकिन क्या अपने ही साधु-संतों का अपमान करके, उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर व्यूज बटोरना ही एकमात्र रास्ता रह गया है?

 

    याद रखना, आलोचना करना सबका अधिकार है, लेकिन आलोचना के नाम पर किसी की बात को तोड़-मरोड़कर पेश करना उचित नहीं।

 

         पूज्य बागेश्वर धाम सरकार के साथ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास खड़ा है। सनातन की आवाज़ को दबाने की कोशिशों का जवाब हम अपने विचारों, एकता और संवैधानिक तरीके से देंगे।

 

               सनातन का अपमान अब चुपचाप सहन नहीं होगा। अपनी आस्था और अपने धर्म के सम्मान के लिए आवाज उठती रहेगी। बागेश्वर धाम सरकार 

 

🚩जय-श्री-राम!                                                       जय-बागेश्वर-धाम-सरकार!                                          जय-गुरुदेव  जय-सन्यासी-बाबा

 

 

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