मानवीय संवेदनाओं के प्रखर शिल्पी:
युगपुरुष कविवर सूर्य
(आध्यात्मिक चिंतक, महनीय साहित्यकार, दार्शनिक, मानवतावादी एवं समाज-सुधारक।)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
“शांत अंतःकरण का अतीव धैर्य”
(उच्च कोटि की आध्यात्मिक व दार्शनिक रचना)
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(जब शब्द शांत होते हैं, व आत्मा बोलती है…)
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बस !
महसूस होने दे रहा हूँ,
ताकि स्वयं को समय मिले…
ठीक होने का।
शांत रहना होता है—
भीतर से स्थिर,
व गहरा धीरज धरना होता है।
जीवन ने
स्वयं ही स्वयं का काव्य रचा,
और स्वयं ही शांत कर दिया।
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