‘शब्दघात’

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अनामिका सिन्हा पाठक ‘अर्श’

वाराणसी, (उ. प्र.)

 

            (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

 

 

                      ‘शब्दघात’

 

शब्द घात से किसी का दिल मत तोड़….

या तो मौन रह या फिर मीठा बोल…।

सब यहीं धरा रह जायेगा…..।

 

भावनाओं को दौलत से मत तौल…

तेरे हर कर्म पर है शिव की नज़र….

लाख पर्दों में छुप जा ,खुल जाएगी तुम्हारी पोल..।

 

कृष्णमय सांवली सावन की बदरिया में रंग जा…

उतार फेंक अपनी बहुरूपिया का खोल…..।

 

शिव की करुणा बरस रही…

विचारों को विराम दे हृदय के द्वार खोल….।

 

मरने के बाद भी सबके दिलों में जिंदा रह…

‘अर्श’ जतन कर कुछ ऐसे अनमोल….।

 

 

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