रचनाकार – बाल कवि अनुराग बघेल
बिजराकापा खुर्द मुंगेली (लोरमी) छ.ग.
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
विघ्न विनाशन
घर-घर में आनंद छाया है,
गणेश चतुर्थी पावन दिवस आया है।
रिद्धि-सिद्धि माँ के दाता तुम हो,
सबके भाग्य विधाता तुम हो।
नमन तुम्हें हे! विघ्न विनाशन,
अति मनभावन महा सिंहासन।
ढोल-नगाड़े बाजे भारी,
झूम उठी है ये दुनिया सारी।
लड्डू-मोदक का भोग चढ़ाया,
अद्भुत है बप्पा तेरी यह माया।
चार भुजाधारी, रूप रसीला,
अपरम्पार है तुम्हारी लीला।
मूषक के ऊपर विराजे हमारे देवा,
सफल करो आप भक्तों की सेवा।
विघ्नहर्ता दुख दूर करो तुम,
सुख-समृद्धि से झोली भरो तुम।
कृपा बरसाओ, कष्ट मिटाओ,
सबके बिगड़े काम-काज बनाओ।
हाथ उठाकर दे दो वरदान,
सबके पूरे हों मनचाहे अरमान।
प्रेम का नाता सदा निभाना,
हर साल हमारे आँगन आना।
श्रद्धा से हम शीश झुकाते,’
गणपति बाप्पा मोरया’ गाते।







