राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
स्काई गार्डन होमस्टे, मैनपाट
छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
पुराने खत, उसकी खुशबू बिखेर गए,
भीनी-भीनी महक आती रही उम्र भर।
कागज की तहों में छुपी थी एक मुस्कान,
स्याही की लकीरों में बसी थी एक पहचान,
हर शब्द ने छुआ, दिल के कोने-कोने को,
हर पन्ना बन गया, मीठी यादों की दास्तान।
समय की हवाओं ने, उड़ाया था प्यार को,
फिर भी खुशबू बसी रही हर कहीं, पर दूर,
आँखों में नमी आई, होंठों पर मुस्कान है,
पुरानी धुन बजती, दिल के तारों पर सुदूर।
अब वो खत नहीं, सिर्फ खुश्बू बाकी है,
जो साँसों में घुलकर, उम्र भर साथ चली,
प्यार की ये खुशबू , कभी मुरझाई नहीं,
धीरे-धीरे दिल में बस, फैली है हर गली ।






