राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
भारतीय !
(कविता)
भारत माँ की गोद में
जन्म लिया हम सबने,
नदियाँ गंगा-यमुना सी,
पहाड़ हिमालय जैसे।
विविधता में एकता है,
रंग-बिरंगे लोग यहाँ,
भाषाएँ सैकड़ों हैं,
फिर भी दिल एक है यहाँ।
मिट्टी की खुश्बू में,
पसीने की खुश्बू है,
किसान की मेहनत से,
अन्न का दाना मिलता है।
आज़ादी के दीवाने थे,
शहीदों का खून बहा,
आज भी वो जज़्बा ज़िंदा,
देश के लिए मर मिटना।
सूरज की पहली किरण,
पूरब से निकलती है,
उम्मीद की नई सुबह,
भारत में ही बसती है।
आओ मिलकर आगे बढ़ें,
शिक्षा, स्वास्थ्य, एकता से,
भारत को फिर से बनाएँ,
सोने की चिड़िया हम सब मिलकर।








