राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
प्यार
खुद से प्यार तो सब करते हैं,
यह बात सब जानते हैं,
दूसरों को दिल से अपना लो,
तभी जीवन खुशियों के गुल खिलते हैं।
किसी के आँसू पोछो त
या मुस्कान बाँट दो मुफ़्त में,
वो पल बन जाता है जादू सा,
जिंदगी में रंग भर जाता है।
अपना दर्द छुपाकर रखते हैं,
पर पराया दुख अपना बना लो।
एक हाथ बढ़ाओ मदद का,
दुनिया तुम्हें गले लगा लेगी।
खुद को प्यार करना जरूरी है,
पर सीमा मत बाँधो उस पर।
प्रेम की नदी जब बह निकले,
तो हर किनारा हरा हो जाता है।
जिस दिन दूसरों को अपनाओगे,
हर सुबह नई खुशी लाएगी।
आँगन में फूल खिलेंगे अनगिनत,
जिंदगी और भी खूबसूरत हो जाएगी।







