धोखा!

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राजेंद्र रंजन गायकवाड

(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक) 

बिलासपुर, छत्तीसगढ़

 

 

               (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)  

 

धोखा!

 

 

धोखेबाजों से दूरी ही समझदारी

जो बार-बार धोखा दे,,

उससे नाता तोड़ना सीखो,

हर बार माफी मांगने पर,

फिर वही खेल खेलना सीखो।

विश्वास टूटा एक बार,

टूटा ही रहता है हमेशा,

रिश्तों के नाम पर ज़हर,

पीना छोड़ दो अब जैसा।

दिल की शांति सबसे बड़ी,

उसके आगे सब फीका है,

धोखेबाज से दूरी रखना,

यही असली तरीका है।

जो बार-बार धोखा दे,

उससे दूर रहना ही समझदारी है,

खुद को बचा लो समय रहते,

वरना रोना ही मजबूरी है।

 

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