प्रा.डॉ. शंकर घनशामदास अंदानी
(आचार्य, सी ए.)
अहिल्या नगर, महाराष्ट्र
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
अहंकार से मुक्ति, आत्मिक शांति
1. अहंकार को त्यागकर, मन में भरिए ज्ञान। प्रेम, दया और क्षमा से, मिलता सच्चा मान॥
2. मन से मिट जाए अगर, मैं-पन की दीवार। आत्मशांति के द्वार पर, खुशियाँ करें पुकार॥
3. ऊँचा होकर क्या मिला, यदि मन में अभिमान। झुकने वाले हृदय में, बसते हैं भगवान॥
4. माया का मद छोड़कर, सत्य राह पर चल। आत्मा के आँगन खिले, शांति-सुख के पल॥
5. अहंकार की आग में, जलता मन दिन-रात। विनम्रता की छाँव में, मिलती सुख की बात॥
6. खुद को सबसे श्रेष्ठ कह, मत करना अभिमान। सबके भीतर ज्योति है, सबका रख सम्मान॥
7. क्रोध, मोह और लोभ से, मन को करो स्वतंत्र। आत्मशांति का दीप तब, होगा हृदय में प्रकट॥
8. जिसने खुद को जीत लिया, जीता जग संसार। अहंकार से मुक्त मन, पाता सुख अपार॥
9. धन-दौलत का मान क्या, पद का कैसा मोह। प्रेम-साधना से मिटे, मन का सारा द्रोह॥
10. मन मंदिर को स्वच्छ रख, छोड़ कपट का भार। आत्मशांति मिल जाएगी, होगा भव से पार॥
11. मैं-मैं का पर्दा हटे, दिखे सत्य का रूप। अंतरमन में खिल उठे, शांति-स्नेह की धूप॥
12. झूठे मान को छोड़कर, सच्चाई अपनाय। अहंकार से मुक्त मन, प्रभु के निकट पहुँचाय॥
13. क्षमा हृदय का आभूषण, विनय आत्मा की शान। इनसे जीवन धन्य हो, बढ़ता सच्चा मान॥
14. इच्छाओं की दौड़ में, खो मत जाना आप। संतोषी मन में बसे, सुख का अनुपम ताप॥
15. अहंकार को जीतकर, प्रेम जगाओ आज। आत्मिक शांति से खिले, जीवन का हर साज॥
१. तप की ज्योति जलाइए, मन में रखिए ध्यान। माँ ब्रह्मचारिणी कृपा से, पूर्ण हों अरमान॥
२. श्वेत वस्त्र की शान माँ, मुख पर तेज अपार। भक्ति, शक्ति, धैर्य से, करती भव उद्धार॥
३. हाथ कमंडल शोभता, माला की मधुर छाँव। माँ के चरणों में मिले, सुख-शांति की ठाँव॥
४. नवदुर्गा की शक्ति माँ, तप की दिव्य मिसाल। ब्रह्मचारिणी कृपा करें, खुशियों से भरें भाल॥ 🙏🌺







