नवीन डिमरी ‘बादल’ ‘सरस्वती सदन’, डिम्मर (सैण) सिमली, चमोली (उत्तराखंड)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
गजल
दर्द तेरी बात ने ऐसा दिया है यार,
चुभ गई है दिल में जैसे कोई पैनी खार।
दिल ने लाखों बार तुझको भूलना चाहा मगर,
याद आता ही रहा तू हर घड़ी हर बार।
तू नहीं तो हर खुशी भी अजनबी लगने लगी,
जैसे बिन सावन के सूना रह गया संसार।
प्यार में तेरे कभी दिखती नहीं कोई कमी,
ज़िंदगी लगने लगी जैसे नई इक बहार।
रात भर जागा किए तेरी यादों के ही साथ,
नींद आई भी तो आँखों में लिए अंगार।
लोग कहते हैं भुला दो बीती बातों को मगर,
कैसे भूलूँ वो निगाहें, वो हँसी, वो प्यार।
वक़्त भी ना भर सका दिल के पुराने ये निशाँ,
जैसे सीने में छिपा हो दर्द का भंडार।
ग़म की बरसातों में भी मुस्कुराता है ‘बादल’,
लोग कहते हैं गजब का हौसला है यार।
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गजल
इसलिए शायद सताते हैं मुझे,
आदमी सीधा बताते हैं मुझे।
गर कभी न उनकी हाँ में हाँ भरूँ,
न जाने क्या-क्या बताते हैं मुझे।
मैं न रोता हूँ, न हँसता हूँ, तभी-
लोग सब पत्थर बताते हैं मुझे।
आज मुझसे काम होगा आ पड़ा,
इसीलिए अपना बताते हैं मुझे।
आज भी तो छेड़ते हैं आदतन,
जब भी तन्हा वो पाते हैं मुझे।
जो हुनर तुमने सिखाये थे कभी,
अब वही जीना सिखाते हैं मुझे।
अब न इनको साथ में ले जाइये,
बात मतलब की बताते हैं मुझे।
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