हेमचंद्र सकलानी
देहरादून
(नया अध्याय,देहरादून)
26 जुलाई विजय दिवस.
आईए कारगिल के अमर शहीदों को करते हैं नमन
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3 मई 1999 को कारगिल युद्ध की शुरुआत हुई थी और 26 जुलाई 1999 को “ऑपरेशन विजय” के साथ इसका अंत हुआ। इस युद्ध के कुछ वर्ष बाद मुझे द्रास, कारगिल, लेह, लद्दाख जाने का अवसर मिला। 3 मई 1999 तक पाकिस्तानी सेना ने कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया था। अत्यधिक बर्फ के कारण सर्दियों में भारतीय सेना नीचे उतर आती थी इसी का लाभ उठाकर पाकिस्तानी कुछ भेष बदलकर कुछ सैनिकों के रूप में घुस कर, मुख्य पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया था। यह बात एक चरवाहे ने नीचे आकर बताई थी। तब कुछ भारतीय सैनिक जांच करने ऊपर गये तो पाकिस्तानी सैनिकों ने उनकी हत्या कर दी थी, यहीं से कारगिल युद्ध की शुरूआत हुई थी।
कुछ समय बाद मुझे द्रास कारगिल की यात्रा ओर इन स्थानो को देखने का अवसर मिला। कारगिल की पर्वतों पर सड़कें नहीं थी मिट्टी, पत्थर, चट्टानों की ऊँची पहाड़ियों पर चढ़ते कई सैनिकों की मृत्यु हुई थी। ऊँची पहाड़ियों से पाकिस्तानी सैनिकों ने नीचे से आते भारतीय सैनिकों पर जबरदस्त गोलाबारी की थी। कारगिल मार्केट पर जबरदस्त बमबारी हुई थी। हमारे सैनिकों का अस्त्र शस्त्र और खाने पीने का सामान ऊपर ले जाना बड़ा ही दुष्कर कार्य था. जबकि पाकिस्तानी सैनिक पहले ही खाने पीने और युद्ध का सामान ले जा चुके थे। पर भारतीय सैनिकों ने हिम्मत नहीं हारी माइनस 35 – 40 डिग्री टेंपरेचर में बटालिक क्षेत्र, टाइगर हिल, तोतलिंग शिखर पर इस युद्ध में पांच सौ चौंतीस सैनिकों, सहित कैप्टेन बत्रा, मनोज पांडे, अर्जुन पाराशर, योगेंद्र यादव सहित अनेक अधिकारियों ने अपनी आहुति दी। अंत में विजय के इस
अभियान को “ऑपरेशन विजय” की संज्ञा दी गई। आईए कारगिल के उन शहीदों के चरणों में अपने श्रद्धा से अर्पित करते हैं।









