सम्पादक दिल्लीः अजय प्रताप सिंह
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
“खापों की हुंकार, विदिशा की बेटी लडेगी बागपत चुनाव”
पश्चिम यूपी की खाप पंचायतों के इतिहास से हिंदुस्तान क्या पूरी दुनिया में ऐसा कौन होगा जो परिचित न हो। इन खाप पंचायतों का एक आदेश यूपी, हरियाणा, राजस्थान, और दिल्ली की सासें अटका देने के लिए काफी माना जाता है।

सरकारें चाहे किसी भी पार्टी की रही हों या रहें, यहाँ खाप के फरमान को ब्रह्म वाक्य यानि पत्थर की लकीर माना जाता है। खाप के कुछ आदेश तो परंपरा ही सर्वोपरि की तर्ज पर कानून से टकराते हैं लेकिन क्या मजाल जो खाप संशोधन की सोचे भी, आखिर में कानून का रखवाला प्रशासन हर बार चार कदम पीछे, हटता आया है। बता दें यहाँ गुर्जरों की, जाटों की अहीरों की खाप पंचायतों का दबदबा सदा से चलता आया है। अनेक बार ये जातियों की खाप आपस में हाथ मिला लेती हैं जब सनातन की बात हो तो। इसका जिता जागता उदाहरण वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे हैं जब ये खाप एकजुट जो हुईं की हिंदुस्तान से कांग्रेस का नामोनिशान लगभग उत्तर भारत से मिट गया। जो आज तक जारी है। लेकिन अब खाप अनेक मुद्दों पर विमुख हो चली हैं।
इस विमुखता का पहला उदाहरण कल यहाँ बागपत के भैडापुर गाँव में देखने को मिला। बिना किसी तामझाम के गुर्जरों की खाप के मुखिया यहाँ प्रधान धर्मवीर सिंह के आहवान पर उनके आवास पर इकट्ठा हुए, जाहिर था सभी मुखिया बुलाने के पीछे निश्वित रुप से कोई विशेष योजना आकार लेने वाली है, ऐसा अंदाज जानकर लगा बैठे, लेकिन मीडिया को मीटिंग से दूर ही रखा गया।
मीटिंग के बाद मीडिया के सवालों और कैमरों की फ्लैश तक को बंद रखने की सख्ती बरती गयी।
खबरनवीस बेचैन थे, जिस पर खाप की ओर से भैडापुर प्रधान के बड़े भाई अजय प्रताप सिंह को सामने किया गया, जो नया अध्याय के दिल्ली संपादक और खाप के पंच भी हैं। खाप के फैसलों पर उन्होंने बताया कि गुर्जरों की खाप बीजेपी सरकार की अनेक नीतियों से नाखुश है,उन्होंने बताया कि बीजेपी के राज में निरंकुशता, भाई भतीजा वाद और भ्रष्टाचार तो बढ़ा ही है वहीं पुलिस पूरी तरह निरंकुश हो गयी है झूठे एनकाउंटर किये जा रहे हैं। फर्जी मुकदमे दर्ज किये जा रहे हैं। उन्होंने राजस्थान में जगन गुर्जर हत्याकांड जो जेल में किया गया का उदाहरण के साथ बिहार के भोजपुर में भारत तिवारी हत्याकांड का जिक्र किया।बताया कि इस बार खाप बीजेपी के खिलाफ खुद आगे आकर यूपी विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार तय करेगी, इसकी शुरुआत एतिहासिक रुप से चर्चित बागपत विधानसभा चुनाव के लिए मध्य प्रदेश के विदिशा की बेटी साधना के नाम का अनुमोदन भी कर दिया है।
साधना कौन है…? बताया गया कि वो मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के गंज बासौदा में सरकारी अध्यापिका हैं डबल एम ए हैं दो बार उन्हें शिक्षा जगत के पुरुस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। प्रखर वक्ता होने के साथ वो सफल ग्रहणी बतायी जाती हैं।
बता दें कि भैडापुर में प्रधान परिवार सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से काफी समृद्ध है जिसकी राजनीति में काफी गहरी पकड़ है। इस परिवार में साधना के अलावा कई और अध्यापक तो हैं ही इंजीनियर, पुलिस और फौज में उच्च पदों पर तो हैं ही, साथ ही कई राष्ट्रीय खिलाड़ी भी परिवार की विरासत की गहराई का पता करने के लिए पर्याप्त हैं। परिवार का संचालन भी साधना के संपादक पति द्बारा ही होता है।
खापों के इतिहास की यह सबसे अनोखी पहल अब चर्चा का विषय तो बन ही गयी है, सत्ता के गलियारों में इससे सांसें अटकी तय मानी जा रही हैं।







