अत्र कुशलम तत्रास्तु।

Spread the love

पंकज शर्मा “तरुण”।

 

                अत्र कुशलम तत्रास्तु।

 

मोबाइल के उदय होने से पूर्व अर्थात बीसवीं सदी के अंत तक भारतीय डाक विभाग के माध्यम से आपसी संपर्क सूत्र चिट्ठियां हुआ करती थी। जिसमें प्रमुख रूप से पोस्ट कार्ड अंतर्देशीय पत्र और लिफाफे हुआ करते थे। पोस्टकार्ड का उपयोग आम तौर पर संक्षिप्त संदेश देने के लिए प्रयोग होता था,वहीं दूसरी ओर प्रेमी प्रेमिका या रिश्तेदार आपसी संवाद के लिए अंतर्देशीय पत्र तथा लिफाफे का प्रयोग किया करते थे।

प्रायः पत्र का प्रारंभ प्रिय, प्रिये, आदरणीय, पूजनीय से हो कर अत्र कुशलम तत्रास्तु के पश्चात विदित हो कि से होता था इसके पश्चात जो परिवार से संबंधित समाचार या संदेश लिखा जाता था। पत्र को इतने सलीके और सम्मान से प्यार से भाव से भरकर लिखा जाता था कि पढ़ने वाला कई बार भावुक हो कर रोने लगता था। यही हाल पत्र को लिखने वाले का भी होता था। ऐसे पत्रों को कई कई बार पढ़ने का चलन था,और उसे सहेज कर भी रखा जाता था। पत्र लेखन की यह कला सभी नर नारियों में पाई जाती थी।यह कला ही फलती फूलती हुई कई लोगों को लेखक या कवि बनाती थी। कल्पना के सागर में गोते लगाने पर बाध्य करती थी। किसी को अगर पत्र लिखा है, तो अंत में यह भी लिखा जाता था कि थोड़ा लिखा है, बहुत समझना। यदि कुछ छूट गया हो तो आप खुद समझदार हैं। पत्र का उत्तर लौटती डाक से देना ,पत्र की प्रतीक्षा में आपका या आपकी लिख कर नाम लिख कर पत्र समाप्त कर दिया जाता था। उन पत्रों को पढ़ने लिखने का आनंद आज के नवीन स्मार्ट फोन पर वॉट्स ऐप संदेश, मैसेंजर या मैसेजेस में कहां आता है? न तो वे भाव आते हैं न उनमें वैसी आत्मीयता ही होती है। हाय हेलो करके अपना संदेश भेजा जाता है। यह अवश्य होता है कि जीवित संवाद हो जाता है लेकिन अब लिखने की कला को जैसे जंग लग गया है। कॉपी पेस्ट का युग हमें पीछे तो धकेल ही रहा है परस्पर रिश्तों में जो नमी होती थी उनको भी रूखा बनाता जा रहा है। अब एक बात अवश्य अच्छी हुई है कि वीडियो कॉल ने प्रत्यक्ष दर्शन का अवसर दिया है हम घर बैठे ही दुनिया के किसी भी कोने में बैठे स्वजनों से प्रत्यक्ष बातचीत कर सकते हैं।आधुनिक तकनीक ने पोस्ट ऑफिसों को भी निरर्थक कर दिया है।   (विनायक फीचर्स)

  • Related Posts

    धान खरीदी के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ हो -डॉ दिलीप साहू।

    Spread the love

    Spread the love  संवाददाता छत्तीसगढ़ः सरोज कंसारी                          (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)                           …

    ग्रामीण अंचल में गूंजने लगे सुवा नृत्य के पारंपरिक गीत, लोक संस्कृति की छटा बिखेर रहीं महिलाएं एवं युवतियां

    Spread the love

    Spread the love  संवाददाता छत्तीसगढ़ः सरोज कंसारी                          (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)                           …

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    धान खरीदी के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ हो -डॉ दिलीप साहू।

    • By User
    • November 8, 2026
    • 11 views
    धान खरीदी के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ हो -डॉ दिलीप साहू।

    ग्रामीण अंचल में गूंजने लगे सुवा नृत्य के पारंपरिक गीत, लोक संस्कृति की छटा बिखेर रहीं महिलाएं एवं युवतियां

    • By User
    • November 8, 2026
    • 15 views
    ग्रामीण अंचल में गूंजने लगे सुवा नृत्य के पारंपरिक गीत, लोक संस्कृति की छटा बिखेर रहीं महिलाएं एवं युवतियां

    श्रद्धालुओं की जान इतनी सस्ती क्यों?

    • By User
    • November 8, 2026
    • 8 views
    श्रद्धालुओं की जान इतनी सस्ती क्यों?

    प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने के लिए नाट्य संस्था सूत्रधार द्वारा मुजफ्फरपुर में नुक्कड़ नाटक।

    • By User
    • November 8, 2026
    • 11 views
    प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने के लिए नाट्य संस्था सूत्रधार द्वारा मुजफ्फरपुर में नुक्कड़ नाटक।

    एम. एस. केशरी पब्लिकेशन द्वारा मालीघाट में लगाया गया बाल दरबार।

    • By User
    • November 8, 2026
    • 9 views
    एम. एस. केशरी पब्लिकेशन द्वारा मालीघाट में लगाया गया बाल दरबार।
    • By User
    • November 8, 2026
    • 14 views