सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय, देहरादून)


ट्राली के सहारे मद्महेश्वर यात्रा बनी थी जोखिम भरी, प्रशासन ने विगत दिनों लगाई थी रोक।
मद्महेश्वर धाम सहित यात्रा पड़ावों पर पसरा सन्नाटा।
तीर्थाटन एवं पर्यटन कारोबार प्रभावित।
ऊखीमठः द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम की यात्रा में आधार शिविर बनातोली में ट्राली से आवागमन तीर्थयात्रियों के लिए जोखिम भरा बना होने से लगातार बढ़ते खतरे और यात्रा मार्ग की विषम परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन द्वारा विगत दिनों मद्महेश्वर यात्रा पर रोक लगाए जाने से धाम सहित पूरी मद्महेश्वर घाटी में सन्नाटा पसरा हुआ है। यात्रा पर रोक का सीधा असर स्थानीय तीर्थाटन एवं पर्यटन कारोबार पर पड़ा है और यात्रा पड़ावों पर तीर्थयात्रियों की आवाजाही थमने से ग्रामीणों, व्यापारियों, घोड़ा-खच्चर संचालकों, होटल-ढाबा संचालकों सहित अन्य व्यवसायियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
मद्महेश्वर यात्रा के आधार शिविर गौण्डार से आगे बनातोली क्षेत्र में बीते वर्षों में प्राकृतिक आपदा के कारण पैदल मार्ग एवं नदी पर बना अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो चुका है। वर्तमान में यात्रियों को नदी पार करने के लिए ट्राली का सहारा लेना पड़ रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने और मौसम के लगातार खराब रहने के कारण ट्राली से आवाजाही करना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय ग्रामीण और व्यापारी भी चिंतित हैं।
ट्राली की रस्सी पर टिकी यात्रा
बनातोली में पैदल पुल की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से यात्रियों को ट्राली के माध्यम से नदी पार करनी पड़ रही है। बरसात के दौरान नदी का प्रवाह तेज होने के कारण ट्राली से आवाजाही का जोखिम और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की जा रही है, लेकिन पुल निर्माण पूरा नहीं होने के कारण तीर्थयात्रियों को जोखिम उठाकर आवागमन करना पड़ रहा है।
यात्रा पड़ावों पर पसरा सन्नाटा
प्रशासन की ओर से यात्रा पर रोक लगाए जाने के बाद मद्महेश्वर धाम सहित गौण्डार, बनातोली, रासी, और अन्य यात्रा पड़ावों पर तीर्थयात्रियों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई है। सामान्य दिनों में यात्रियों से गुलजार रहने वाले यात्रा पड़ावों पर अब सन्नाटा दिखाई दे रहा है। यात्रा सीजन में तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने से स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलते हैं, लेकिन यात्रा बाधित होने से उनकी आय पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
तीर्थाटन के साथ पर्यटन कारोबार भी प्रभावित
मद्महेश्वर घाटी में तीर्थाटन स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यात्रा के दौरान होटल, होमस्टे, ढाबे, दुकानें, घोड़ा-खच्चर सेवा, स्थानीय उत्पादों तथा अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को रोजगार मिलता है। यात्रा पर रोक लगने से इन सभी व्यवसायों पर असर पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में पहले ही कारोबार सीमित रहता है और यात्रा बाधित होने से आर्थिक नुकसान और बढ़ गया है। पूर्व प्रधान बीर सिंह पंवार, बलवीर पंवार ने प्रशासन से मांग की है कि मौसम एवं यात्रा मार्ग की स्थिति का लगातार निरीक्षण करते हुए सुरक्षित परिस्थितियों में यात्रा पुनः शुरू कराई जाए। साथ ही बनातोली में स्थायी पुल का निर्माण शीघ्र पूरा कर तीर्थयात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि भविष्य में ट्राली पर निर्भरता समाप्त हो सके।
सुरक्षा सर्वोपरि, स्थायी समाधान जरूरी
मद्महेश्वर यात्रा क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां अत्यंत संवेदनशील हैं। बरसात में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने, भूस्खलन और मार्ग अवरुद्ध होने की घटनाओं के बीच तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में प्रशासन द्वारा एहतियातन यात्रा पर रोक लगाने का निर्णय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्थायी रोक के साथ-साथ बनातोली की ट्राली समस्या का स्थायी समाधान भी जरूरी है।
व्यापारी भरत सिंह पंवार का कहना है कि यदि शीघ्र सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आगामी यात्रा सीजन में भी तीर्थयात्रियों को इसी तरह जोखिम उठाना पड़ सकता है। स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों ने बनातोली में पुल निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की मांग की है। वहीं दूसरी ओर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता आर सी नैथानी का कहना है कि बनातोली में स्थाई पुल का निर्माण गतिमान है, अधिक बारिश के कारण निर्माण कार्यों में बांधा पहुंच रही हैं। कहा की मोरखम्मा नदी का जल स्तर कम होते ही नदी पर अस्थाई पुल बनाकर मद्महेश्वर यात्रा को शीघ्र सुचारू करने की पहल की जायेगी।







