नर्मदा तट का पांडवकालीन तीर्थ: विमलेश्वर-चंद्रेश्वर महादेव

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अर्पण जैन ‘अविचल’

 

 

            (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

नर्मदा तट का पांडवकालीन तीर्थ: विमलेश्वर-चंद्रेश्वर महादेव

 

 

 

मोक्षदायिनी नर्मदा सुरम्य सौंदर्य और पाप नाशिनी स्वरूप में कलयुग में विद्यमान है और इसके तटीय साम्राज्य में अनगिनत शिव तीर्थ हैं, जो ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे ही तीर्थों में एक तीर्थ मध्यप्रदेश में नर्मदा के उत्तर तट पर निमाड़ क्षेत्र में खरगौन जिले के बड़वाह से लगभग सात किमी दूर सनवाद मार्ग में पुल से पूर्व ही बेलसर गाँव में स्थित है।यहां अति प्राचीन विमलेश्वर एवं चंद्रेश्वर महादेव मंदिर है।

विमलेश्वर के शाब्दिक अर्थ

 

विमल (निर्मल/पवित्र) ईश्वर (स्वामी), अर्थात् वह ईश्वर जो स्वयं निर्मल और पवित्रता प्रदान करने वाले हैं, श्रीमद्नर्मदारहस्यम ग्रंथ के सत्तावनवें अध्याय में विमलेश्वर तीर्थ की व्युत्पत्ति के बारे में वर्णन है। इसी के साथ स्कन्द पुराण के नर्मदा पुराण और वायु पुराण में भी विमलेश्वर तीर्थ का वर्णन प्राप्त होता है।

विमलेश्वर महादेव मंदिर में स्थित शिवलिंग की स्थापना कुन्ती पुत्र भीम ने की थी। इस तरह इस मंदिर को पांडवकालीन माना जाता है। विमलेश्वर मंदिर के ठीक पास पहाड़ी पर चंद्रेश्वर महादेव मंदिर भी स्थापित है। इस मंदिर में द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना भी है और ढाई मन का अष्टधातु का घंटा श्रद्धालुओं सहित आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। चंद्रेश्वर मंदिर के बाहर एक प्रतिमा स्थापित है, जो द्वारपाल जी की है। गुफाएँ और जलकुंड भी हैं। विमलेश्वर महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार अहिल्याबाई के शासनकाल में हुआ, तभी से पुजारी को नियुक्त कर जीवनयापन के लिए कृषि योग्य भूमि भी दी गई है। ग्राम बेलसर नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर है। यहाँ दो आश्रम, जिनमें रेवा धाम आश्रम और बर्फानी आश्रम में नर्मदा परिक्रमा करने वाले परिक्रमावासियों के लिए ठहरने और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था आश्रम संचालक करते हैं। तीसरे आश्रम रामेश्वर धाम मे नर्मदा मंदिर स्थित है।

 

बेलसर में आयोजित होते हैं दो उत्सव

 

विमलेश्वर तीर्थ ग्राम बेलसर में होने से ग्रामवासी और ग्राम पंचायत मिलकर दो वार्षिक उत्सव मनाते हैं, एक महाशिवरात्रि पर, जिसमें लगने वाले विशाल मेले में आसपास के हजारों लोग सम्मिलित होते हैं, दूसरा उत्सव देवउठनी ग्यारस के बाद आरम्भ होने वाली पंचक्रोशी यात्रा का है। यात्रा का पड़ाव विमलेश्वर तीर्थ में होने के कारण उस दिन यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में होती है।

 

कैसे पहुँचें विमलेश्वर तीर्थ ?

 

नर्मदा की सुरम्य लहरों के सुंदर तट पर स्थित विमलेश्वर तीर्थ प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर क्षेत्र है। यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर के बहुत समीप है और देश के अन्य शहरों और कस्बों के बीच परिवहन के विभिन्न साधनों के माध्यम से सुगम संपर्क है। विमलेश्वर और ओंकारेश्वर से निकटतम हवाई अड्डा देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा (इंदौर) है, जो 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह हवाई अड्डा दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, श्रीनगर, रायपुर, लखनऊ, पुणे, पटना, वड़ोदरा आदि भारत के कई शहरों से जुड़ा हुआ है। ओंकारेश्वर से निकट ही खंडवा रेलवे स्टेशन है, जो 77 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

खंडवा रेलवे स्टेशन भारत के विभिन्न शहरों और कस्बों से जुड़ा हुआ है। इतनी ही दूरी पर इन्दौर जंक्शन भी है। सड़क मार्ग से ओंकारेश्वर-विमलेश्वर को राज्य और देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली विभिन्न और नियमित बस सेवाएँ उपलब्ध हैं। ओंकारेश्वर से सबसे लोकप्रिय बस गंतव्यों में उज्जैन, खंडवा, खरगौन और इंदौर शामिल हैं। विमलेश्वर तीर्थ जाने के लिए सड़क मार्ग से निजी वाहन से भी बड़वाह से पहुँचा जा सकता है इसके अलावा बस से बड़वाह उतरकर वहाँ से रिक्शा आदि विमलेश्वर (बेलसर) के लिए उपलब्ध हैं।।(साभार- मप्र सन्देश )

इस प्रकार नर्मदा की पवित्र धारा के तट पर बसा विमलेश्वर-चंद्रेश्वर तीर्थ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और प्रकृति का संगम है। पांडवकालीन मान्यता, पुराणों में उल्लेख और अहिल्याबाई द्वारा कराया गया जीर्णोद्धार इसे और भी गौरवशाली बनाते हैं। यहां आने वाला हर श्रद्धालु न केवल शिव की आराधना करता है, बल्कि नर्मदा की निर्मल लहरों में अपने पापों को धोकर मोक्ष की ओर एक कदम बढ़ाता है। महाशिवरात्रि का मेला और पंचक्रोशी यात्रा के समय लाखों भक्तों का यहां उमड़ना इस बात का प्रमाण है कि आज भी यह तीर्थ जन-जन के हृदय में बसा हुआ है। नर्मदा परिक्रमा करने वाले साधु-संतों और गृहस्थों के लिए यहां के आश्रम सहारा बनते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह स्थान ओंकारेश्वर के निकट होने के कारण धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यदि आप शांति, भक्ति और इतिहास को एक साथ अनुभव करना चाहते हैं तो एक बार विमलेश्वर अवश्य जाएं। नर्मदा मैया की गोद में बसा यह धाम निश्चित ही आपको आत्मिक शांति और शिव कृपा प्रदान करेगा।     (विनायक फीचर्स)

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