सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका
रिपोर्टर/उद्घोषिका, नवापारा-राजिम,
रायपुर, (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
आलेख:
“सांस-सांस में शुक्रिया, अंदर सुकून बसाना है!”
— सुश्री सरोज कंसारी
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काव्य:
”जब संतुष्ट हो जाते हो,
तो बाहर का कोई भी तूफान
तुम्हारे अंदर तक नहीं पहुंच पाता।
एक पल रुको। सांस लो।”
अपने जीवन को गहराई से देखो। जो आज तुम्हारे पास है – रिश्ते, सेहत, एक और सुबह… इसका सम्मान अभी करें। मनुष्य जीवन में भागदौड़ तो है। पर इसी भागदौड़ के बीच हम सीखते हैं, बढ़ते हैं। दौलत, शोहरत, पद, प्रतिष्ठा, सुख-सुविधा की चाह हमें आगे ले जाती है। हाँ, कभी-कभी मन थकता है। रिश्तों की उलझन आती है, जिम्मेदारियाँ होती हैं। पर इतना संघर्ष करने के बाद भी जब दिल में सवाल आता है “जिंदगी क्या चाहती है?” तो समझ जाओ आत्मा तुम्हें बुला रही है। इस जीवन के सफर की मंजिल सुकून है। और वो सुकून हम खुद बना सकते हैं।
जिंदगी में अगर प्रेम भरा मीठा एहसास है, जीने का उत्साह है, तो समझो तुम जिंदगी जी रहे हो। सुबह नई उम्मीद लाती है और रात हमें सिखाकर सुलाती है। उद्देश्यपूर्ण जीवन ही सार्थक है। अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा समय निकालकर स्वस्थ जीवनशैली, व्यक्तित्व के विकास, समाज, परिवार और राष्ट्र के उत्थान के लिए सोचो। जीवन तुम्हारा है, इसे श्रेष्ठ बनाओ। हर पल को साकार करो, तभी इसका महत्व है। कभी अपने दिल की गहराई में जाकर पूछो! जिंदगी क्या चाहती है? जिंदगी मतलब हमें साँसें मिली हैं। इसे पूरे आनंद के साथ जीना है। मन में उत्साह रखना है। आज जीवन थोड़ा अस्त-व्यस्त लग सकता है। पर काम के बाद भी हम शांति चुन सकते हैं और रात को चैन से सो सकते हैं। कारण समझ आ गया – आलस्य को हटाकर कर्म, निराशा को हटाकर उम्मीद,
भोग-मोह-लोभ की जगह संतोष।
जिंदगी हमसे चाहती है कि हम व्यवहारिक, चारित्रिक, मानसिक और बौद्धिक विकास करते रहें। नकल मत करो, अपना रास्ता खुद बनाओ। दिखावे की होड़ छोड़ो। असली जिंदगी ऑनलाइन से हटकर हकीकत में है। वहाँ भले ही दौलत कम हो, पर छोटी-छोटी खुशियाँ दिल को छूती हैं। अपनों का सच्चा प्यार, अपनापन, प्रेम का एहसास अंतर्मन को भीगो देता है। जीवन में चाहे लोग कम हों, पर उनमें लगाव, विश्वास और समर्पण हो। भागो मत। शांत होकर उन खुशियों को पहले गले लगाओ जिन्हें तुम सच में जीना चाहते हो। दुख का बोझ मत ढोओ, उसे सीख में बदल दो। ऑनलाइन से निकलकर ऑफलाइन ज्यादा रहो। एक-दूसरे से सुख-दुख बाँटो। कल को बेहतर बनाने के लिए प्लान करो, पर आज को जीना मत भूलो। हम नहीं जानते कल क्या हो। इसलिए आज के हर पल का उपयोग करो। खुलकर जीना मतलब दिल से मुस्कुराना उन लम्हों में जो तुम्हारे हैं। मित्र, बच्चे, प्रकृति, सगे-संबंधी, रिश्ते-नाते सब जरूरी हैं। इन्हें निभाओ, एक-दूसरे का साथ दो। जोड़ने का काम करो, तोड़ो मत। न घर, न भरोसा, न परिवार, न रिश्ते। सुकून से रहने के लिए दिल में प्यार रखो। परिस्थिति कैसी भी हो, उम्मीद रखो। जख्म हर दिल में हो सकते हैं, तो तुम मरहम बनो।
जिंदगी शिकायत नहीं चाहती, वो चाहती है तुम हर सांस के लिए आभारी रहो। उसने तुम्हें जीने का मौका दिया है। जलन मत करो। मेहनत से अपना जीवन साकार करो। जो पल है, उसी को अपना मानो। खाली बैठकर कल्पनाओं में खोने से बेहतर है सक्रिय रहो। वो काम करो जो तुम्हें खुशी दे। कुछ नया सीखो, सहयोग करो, रचनात्मक बनो। सेवा कर्म में अपना समय दो। रुको मत। आगे बढ़ते रहो। किसी को गिराने की मत सोचो। सबको साथ लेकर चलो। जीवन में हर दिन एक जैसे नहीं होते। अच्छे-बुरे दिन आते-जाते हैं। पर हम किसी मजबूरी में भी गलत काम नहीं करेंगे। हर किसी की मजबूरी समझेंगे। घमंड नहीं करेंगे। स्वस्थ शरीर और शांत मन के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। संयमित रहेंगे।
यह जीवन बाहरी उपलब्धियों की दौड़ नहीं, बल्कि आंतरिक संतोष और सजगता की यात्रा है। जब मन शांत और संतुष्ट हो जाता है, तो कोई भी परिस्थिति हमें भीतर से हिला नहीं पाती। हर सांस एक अवसर है – सीखने का, प्रेम करने का, और आभार व्यक्त करने का। दर्शन ये कहता है कि सुकून बाजार में नहीं मिलता, उसे हमें अपने कर्म, संयम और रिश्तों के प्रति समर्पण से खुद बनाना पड़ता है। अतीत गया, भविष्य अनिश्चित है, इसलिए “अभी” को पूरी चेतना से जीना ही सच्चा जीवन है। सेवा, सहयोग और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ना ही मनुष्य जीवन की सार्थकता है।
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