पुलिस मुख्यालय से सत्ता के गलियारों तक चर्चा में है बिहार डीजीपी की 21 दिन की छुट्टी

Spread the love

 

रंजीत विद्यार्थी

 

 

               (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

पुलिस मुख्यालय से सत्ता के गलियारों तक चर्चा में है बिहार डीजीपी की 21 दिन की छुट्टी

 

 

 

 

नौकरशाही में ‘लंबी छुट्टी’ का मतलब हमेशा सिर्फ छुट्टी नहीं होता। और जब बात राज्य के पुलिस महानिदेशक की हो, तो सवाल और भी गहरे हो जाते हैं। बिहार के डीजीपी विनय कुमार के 21 दिन के अवकाश ने पुलिस मुख्यालय से लेकर सत्ता के गलियारों तक चर्चाओं को हवा दे दी है। लोग इस छुट्टी के अपने-अपने अर्थ निकाल रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर डीजीपी की छुट्टी इतनी चर्चा में क्यों है?

         अपने जमाने की चर्चित फिल्म ‘गंगाजल’ में एसपी अमित कुमार की लंबी छुट्टी सिर्फ एक प्रशासनिक घटना नहीं थी। उसके पीछे सत्ता, व्यवस्था और पुलिस के भीतर के समीकरणों की कहानी थी। बिहार में विनय कुमार की छुट्टी को भी कुछ लोग इसी नजर से देख रहे हैं। हालांकि, इस मामले की वास्तविक तस्वीर आने वाले घटनाक्रम से ही साफ होगी।

          विनय कुमार के अवकाश के दौरान 1991 बैच की आईपीएस अधिकारी प्रीता वर्मा को प्रभारी डीजीपी की जिम्मेदारी दी गई है। गृह विभाग का आदेश जारी हो चुका है। यानी, फिलहाल व्यवस्था स्पष्ट है लेकिन व्यवस्था के पीछे का सवाल अभी खुला हुआ है।

           सवाल यह नहीं है कि विनय कुमार छुट्टी पर क्यों गए। आधिकारिक तौर पर इसके कारण बताए गए हैं। बड़ा सवाल यह है कि उनकी अनुपस्थिति से पुलिस मुख्यालय के समीकरण पर क्या असर पड़ेगा? क्या यह सिर्फ 21 दिनों की प्रशासनिक व्यवस्था है या आने वाले दिनों में डीजीपी की कुर्सी को लेकर कोई बड़ा बदलाव आकार ले रहा है?

          ब्यूरोक्रेटिक और आईपीएस हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का मानना है कि विनय कुमार की पुलिस मुख्यालय में वापसी को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यदि आगे चलकर नेतृत्व में बदलाव होता है तो डीजीपी की अगली नियुक्ति को लेकर स्वाभाविक रूप से नए समीकरण बनेंगे।

          डीजीपी की नियुक्ति में वरिष्ठता के साथ सेवा-अवधि, प्रशासनिक अनुभव और सरकार के सामने उपलब्ध विकल्प जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं। यदि आने वाले महीनों में कुछ वरिष्ठ अधिकारी सेवानिवृत्त होते हैं तो संभावित दावेदारों की सूची और वरिष्ठता का क्रम बदल सकता है।

            इसी संदर्भ में कुंदन कृष्णन का नाम भी चर्चा में है। कुछ प्रशासनिक और पुलिस हलकों में उन्हें संभावित दावेदारों में गिना जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि यदि कुछ वरिष्ठ अधिकारी सेवा से बाहर हो जाते हैं तो उनके लिए समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि, अभी इसे किसी तय नियुक्ति या निर्णय के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।

               एक तरफ मौजूदा डीजीपी अवकाश पर हैं, दूसरी तरफ प्रभारी डीजीपी की नियुक्ति हुई है, तीसरी तरफ वरिष्ठ अधिकारियों की सेवानिवृत्ति का कैलेंडर है और चौथी तरफ अगली नियुक्ति की संभावनाएं। इन घटनाओं को जोड़कर देखने वाले लोग इसे एक बड़े प्रशासनिक समीकरण का हिस्सा मान रहे हैं लेकिन सवाल यह भी है कि क्या हर प्रशासनिक घटना के पीछे कोई ‘खेल’ तलाशना उचित है? इसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है। जब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट निर्णय या दस्तावेज सामने नहीं आता, तब तक ये बातें चर्चाओं और अटकलों के दायरे में ही रहेंगी।

           डीजीपी की कुर्सी केवल पुलिस प्रशासन का पद नहीं है। राज्य की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशासन की दिशा पर इसका सीधा असर पड़ता है। इसलिए इस कुर्सी पर होने वाला कोई भी बदलाव स्वाभाविक रूप से राजनीतिक महत्व भी रखता है।

           बिहार में सत्ता के समीकरण बदलने के साथ प्रशासनिक तंत्र में विभिन्न राजनीतिक प्रभावों को लेकर चर्चाएं भी होती रही हैं। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री और जदयू के मुंगेर सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के प्रशासनिक प्रभाव को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक आकलन सामने आते रहे हैं।

          कुछ राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या विनय कुमार के घटनाक्रम को बिहार में बदलते सत्ता-संतुलन के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए? क्या पुलिस मुख्यालय में नेतृत्व का संभावित बदलाव प्रशासनिक बदलाव के साथ-साथ सत्ता के भीतर प्रभाव के बदलते समीकरण का संकेत हो सकता है?

          इन सवालों का कोई आधिकारिक उत्तर अभी सामने नहीं आया है। इसलिए इन्हें निष्कर्ष की तरह नहीं, राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

          इधर विनय कुमार के अगले संभावित पद को लेकर भी चर्चाएं हैं। सूत्रों के हवाले से राज्य सूचना आयुक्त बनाए जाने की संभावना की बात कही जा रही है। यदि ऐसा कोई निर्णय होता है तो पुलिस मुख्यालय से उनकी विदाई को केवल पद से हटाए जाने के रूप में नहीं, बल्कि किसी दूसरे महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व में स्थानांतरण के रूप में देखा जा सकेगा। लेकिन फिलहाल यह भी केवल चर्चा है। आधिकारिक निर्णय आने के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी।

        पुलिस महकमे में एक महत्वपूर्ण जिले के पुलिस कप्तान को लेकर भी बदलाव की चर्चा है। सूत्रों का दावा है कि सरकार के स्तर पर इस अधिकारी को लेकर विचार चल रहा है और आने वाले दिनों में तबादला संभव है। यदि ऐसा होता है तो इसे अलग-थलग प्रशासनिक फैसला मानना होगा या डीजीपी स्तर पर शुरू हुए व्यापक बदलाव की अगली कड़ी-यह भी तभी स्पष्ट होगा जब आदेश सामने आएगा।

          फिलहाल बिहार पुलिस में तीन चीजें एक साथ चर्चा में हैं – डीजीपी की छुट्टी, अगली डीजीपी नियुक्ति का संभावित समीकरण और पुलिस महकमे में संभावित बदलाव। इन तीनों को जोड़कर कई तरह की कहानियां बनाई जा रही हैं। लेकिन कहानी और तथ्य के बीच फर्क बनाए रखना जरूरी है क्योंकि डीजीपी की कुर्सी किसी राजनीतिक गुट की संपत्ति नहीं, राज्य पुलिस की संस्थागत जिम्मेदारी है। इस पद पर नियुक्ति जितनी महत्वपूर्ण है, उसकी प्रक्रिया की पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

       विनय कुमार की छुट्टी खत्म होगी तो तस्वीर का एक हिस्सा साफ होगा। उसके बाद वे उसी पद पर लौटते हैं या कोई नई व्यवस्था बनती है, यह आने वाले दिनों में पता चलेगा।

 

 

          लेकिन फिलहाल इतना जरूर है कि उनकी 21 दिन की छुट्टी ने बिहार पुलिस में उस सवाल को फिर सामने ला दिया है, जिसे सत्ता के गलियारों में अक्सर धीमी आवाज में पूछा जाता है – कुर्सी खाली होने से पहले क्या समीकरण बदलते हैं, या समीकरण बदलने के लिए ही कुर्सी खाली होती है?

                   (विनायक फीचर्स)

  • Related Posts

    प्रेम जीवन का आधार

    Spread the love

    Spread the love     डॉ. शंकर घनश्याम दास अंदानी (सी. ए.)      (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)                           प्रेम…

    देश में पहली बार लखनऊ में 4 अक्टूबर को होगा ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू प्रतिनिधि महासम्मेलन, 21 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

    Spread the love

    Spread the love  रचना गौतम     (सचिव)  विश्व हिन्दू रक्षा परिषद                      (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)   देश में पहली बार…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    प्रेम जीवन का आधार

    • By User
    • September 20, 2026
    • 5 views
    प्रेम जीवन का आधार

    नंदादेवी मेले में भव्य झोड़ा प्रतियोगिता, नंदादेवी मेले में गूंजे कुमाऊं के पारंपरिक झोड़े, दर्जनों महिलाओं ने दी शानदार प्रस्तुतियां, खचाखच भरी रही दर्शक दीर्घा, लोक संस्कृति की रंगत में रंगा नंदादेवी परिसर।

    • By User
    • September 20, 2026
    • 10 views
    नंदादेवी मेले में भव्य झोड़ा प्रतियोगिता, नंदादेवी मेले में गूंजे कुमाऊं के पारंपरिक झोड़े, दर्जनों महिलाओं ने दी शानदार प्रस्तुतियां, खचाखच भरी रही दर्शक दीर्घा, लोक संस्कृति की रंगत में रंगा नंदादेवी परिसर।

    उदय शंकर की धरती पर सजा कला का भव्य समारोह, सात दिवसीय कार्यशाला संपन।

    • By User
    • September 20, 2026
    • 11 views
    उदय शंकर की धरती पर सजा कला का भव्य समारोह, सात दिवसीय कार्यशाला संपन।

    खेल महाकुंभ के अंतर्गत विधानसभा स्तरीय विधायक चैंपियन ट्रॉफी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी सम्मानित।

    • By User
    • September 20, 2026
    • 13 views
    खेल महाकुंभ के अंतर्गत विधानसभा स्तरीय विधायक चैंपियन ट्रॉफी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी सम्मानित।

    देश में पहली बार लखनऊ में 4 अक्टूबर को होगा ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू प्रतिनिधि महासम्मेलन, 21 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

    • By User
    • September 20, 2026
    • 11 views
    देश में पहली बार लखनऊ में 4 अक्टूबर को होगा ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू प्रतिनिधि महासम्मेलन, 21 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

    सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत जनपद के अन्तर्गत जनपद अल्मोड़ा में स्वच्छता अभियान।

    • By User
    • September 20, 2026
    • 10 views
    सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत जनपद के अन्तर्गत जनपद अल्मोड़ा में स्वच्छता अभियान।