नंदादेवी मेले में भव्य झोड़ा प्रतियोगिता, नंदादेवी मेले में गूंजे कुमाऊं के पारंपरिक झोड़े, दर्जनों महिलाओं ने दी शानदार प्रस्तुतियां, खचाखच भरी रही दर्शक दीर्घा, लोक संस्कृति की रंगत में रंगा नंदादेवी परिसर।

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मीडिया प्रभारी अल्मोडा़ः दिनेश भट्ट  

 

                      (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

 

नंदादेवी मेले में भव्य झोड़ा प्रतियोगिता, नंदादेवी मेले में गूंजे कुमाऊं के पारंपरिक झोड़े, दर्जनों महिलाओं ने दी शानदार प्रस्तुतियां, खचाखच भरी रही दर्शक दीर्घा, लोक संस्कृति की रंगत में रंगा नंदादेवी परिसर।

 

 

         अल्मोड़ाः ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध नंदादेवी मेले के तहत रविवार को भव्य झोड़ा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का शुभारंभ दर्जा राज्यमंत्री गंगा बिष्ट ने मल्ला महल में किया। इसके बाद झोड़ा टीमें बाजार होते हुए नंदा देवी मंदिर पहुंची।प्रतियोगिता में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंची दर्जनों महिलाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने सामूहिक रूप से झोड़ा गायन एवं नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। झोड़े की पारंपरिक धुनों और लोकगीतों से पूरा वातावरण कुमाऊं की लोक संस्कृति के रंग में रंग गया।झोड़ा प्रतियोगिता को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आयोजन स्थल की दर्शक दीर्घा देखते ही देखते खचाखच भर गई। दर्शकों ने प्रतिभागी महिलाओं का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहवर्धन किया। महिलाओं के बीच झोड़ा प्रस्तुतियों को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया।

 

प्रतियोगिता में महिलाओं ने कुमाऊं की पारंपरिक लोक संस्कृति, लोकगीत और सामूहिक नृत्य की शानदार झलक प्रस्तुत की। कई प्रस्तुतियों में पहाड़ की जीवनशैली, सामाजिक सरोकार और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ ही मेले में पहुंचे श्रद्धालु और पर्यटक भी झोड़ा प्रतियोगिता का आनंद लेते नजर आए।आयोजक गीता मेहरा ने कहा कि नंदादेवी मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का भी महत्वपूर्ण उत्सव है। झोड़ा हमारी पहचान और हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता का उद्देश्य महिलाओं को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ना और पारंपरिक लोक विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

 

गीता मेहरा ने कहा कि आज की व्यस्त जीवनशैली में हमारी कई पारंपरिक विधाएं धीरे-धीरे पीछे छूट रही हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से उन्हें मंच देने और लोगों के बीच जीवंत बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने प्रतियोगिता में उत्साह के साथ प्रतिभाग करने वाली सभी महिलाओं और कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले लोगों का आभार जताया।उन्होंने कहा कि महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी यह दर्शाती है कि आज भी कुमाऊं की लोक संस्कृति के प्रति लोगों में गहरा लगाव है। नंदादेवी मेले के मंच से झोड़ा जैसी पारंपरिक विधाओं को बढ़ावा देना आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।प्रतियोगिता के दौरान दर्शकों में भी खासा उत्साह रहा। पारंपरिक झोड़े की धुनो पर महिलाओं के सामूहिक नृत्य ने मेले की रौनक को और बढ़ा दिया। आयोजन स्थल देर तक लोक संस्कृति की रंगत में सराबोर रहा। राजेंद्र बिष्ट, मुख्य सांस्कृतिक संयोजक अर्जुन बिष्ट, अध्यक्ष मनोज वर्मा, सचिव मनोज सनवाल, संयोजक तारा चंद्र जोशी, गोविंद मेहरा के अलावा अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सैकड़ों की संख्या में लोग कार्यक्रम देखने पहुंचे।

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