सुश्री सरोज कंसारी
(कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका)
रिपोर्टर एवं उद्घोषिका
नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
आलेख:
मुस्कुराकर सीखते-सीखते जाना
: सुश्री सरोज कंसारी
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जिंदगी हर कदम पर एक नया सबक है। जिंदगी की इस यात्रा में जब हम निकलते हैं तब हम कुछ सोचकर, एक उद्देश्य को लेकर या कोई ख्वाब सजाकर मन ही मन बहुत सुखद एहसास से भरे होते हैं। उसे पूर्ण करने के लिए कभी सरल तो कभी कठिन होते हैं रास्ते। हर पग पर जिंदगी का एक अलग ही रूप और रंग होता है। कहीं फूल तो कहीं काँटे मिलते हैं। लेकिन कहते हैं न, अगर मन में उत्साह हो और मंजिल तक जाने की चाह हो तो कोई भी बाधा हमें रोक नहीं सकती। बस चाहत सच्ची होनी चाहिए – एक लगन कुछ करने की, प्यार से जिंदगी गुजारने की, मुस्कुराने की और उसमें खो जाने की। हर लम्हे को अपना बना लेने की जब ठान लेते हैं, तो फिर नकारात्मक सोच यूं ही नष्ट हो जाती है। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। हर इंसान के जीवन में सुख-दुख की बौछार होती ही रहती है। कभी गम की काली घटा छा जाती है, तो कभी खुशी से झूमने के कई पल सामने आते हैं। लेकिन जो हर परिस्थिति में तालमेल बिठा लेते हैं, उदास न होकर फिर से नई ताजगी भरकर जीने के लिए नई उम्मीद से खड़े हो उठते हैं, तब उनके लिए हर बंद दरवाजा खुल जाता है। अर्थात जब कुछ करने और आगे बढ़ने की गवाही दिल दे, किसी प्रकार की शंका न हो तो चंचल मन भी एकाग्र हो जाता है। हम भटकने की बजाय अपनी सही दिशा में जाते हैं, जहाँ बेवजह की कोई उलझन नहीं होती। यही वजह है कि कार्य करने की क्षमता भी बढ़ती है, हम सक्रिय हो जाते हैं। पूर्ण रूप से समर्पित होकर उस कार्य को करते हैं। आत्मविश्वास में बहुत शक्ति होती है। एक इंसान के कई रिश्ते-नाते, पहचान, सगे-संबंधी, मित्र-पड़ोसी और कुछ बहुत ही करीबी जन होते हैं। लेकिन हर किसी से हम एक समान व्यवहार नहीं कर पाते। हर पग पर एक नई कहानी, दुखद घटना, होनी-अनहोनी से सामना होता है, जिससे हमारी मानसिकता भी परिवर्तित होती है। अगर हम अंतर्मन से किसी खुशी को महसूस करते हैं, किसी प्रकार की चिंता नहीं, मन में कोई द्वंद्व नहीं है, स्वस्थ हैं, तब हम अपने सानिध्य में आने वाले हर किसी से मधुर संबंध स्थापित कर पाते हैं। लेकिन जब मन विचलित है, किसी बात को लेकर परेशान है, ऐसे में हम उदास हो जाते हैं और हर किसी को अपनी मन की व्यथा नहीं बता पाते, किसी समस्या का समाधान नहीं कर पाते। कभी-कभी एकदम गुमसुम हो जाते हैं। हर इंसान की जिंदगी में कोई न कोई दुविधा, कष्ट और तकलीफ तो होती है। इसलिए बिना जाने किसी का कभी मजाक मत बनाइए, न ही उन्हें भला-बुरा कहिए। चाहे कोई भी हो, अमीर-गरीब, अपने या पराए, हर इंसान की मजबूरी और उनकी मानसिक स्थिति को समझने की कोशिश अवश्य कीजिए। किसी को जाने-समझे बिना ही कोई फैसला जब हम कर देते हैं, उन्हें दुत्कार देते हैं या बुरा बर्ताव करते हैं, इस बीच कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए, वे गलत कदम उठा लें और हम बाद में यह जानें कि वो सही थे, तो बहुत पछतावा होता है और फिर हम कोई सुधार नहीं कर पाते। इसलिए धैर्य रखिए, सोचिए और हर किसी को अपनापन दीजिए। जीवन का हर लम्हा एक सबक है, एक नया अनुभव है जो हमें जीने के लिए आवश्यक जानकारी, मार्गदर्शन देता है। यह हम पर निर्भर है कि कर्म पथ पर अग्रसर रहते हुए अपने जीवन के हर क्षेत्र में कितना ज्ञान ले सकते हैं। हर इंसान के पास बहुत सी विशेषताएँ, हुनर और अच्छाइयाँ होती हैं। किसी के बाहरी स्वभाव को देखकर ही अंदाजा मत लगाइए कि वो कैसा है? उसके पास जाकर उनके जीवन से जुड़ी कहानी सुनिए! आत्मीय संवाद कीजिए, उनकी हर व्यथा, कार्य और सोच से सीख सकते हैं। जीवन में हम जो भी गलती करते हैं, अनुभव की कमी की वजह से होती है। इसलिए किसी के प्रति अपनी सोच नकारात्मक मत कीजिए। अपने जीवन के हर पग में हम न जाने कितने लोगों से मिलते हैं, उनके बर्ताव का मूल्यांकन करते हैं। लेकिन आपस में परिवार, समाज, पड़ोस, मित्र और राष्ट्र के बीच रहते हुए जो भी होता है, उससे हमें प्रेरणा मिलती है। अगर हम सही हैं, अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, बेईमानी नहीं करते, स्वार्थ नहीं रखते, भेदभाव की भावना नहीं रखते, वैसे ही सभी से अपेक्षा करते हैं। लेकिन अलग परिवेश में रहने की वजह से सभी अपनी परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालते हैं। कोई बचपन से ही सुख-सुविधा और अपनों के बीच रहता है। बहुत लोग ऐसे भी हैं जिन्हें कभी किसी अपने का साथ नहीं मिला, गरीबी में जीवन यापन किया, दुख ही मिला। क्रोध, नफरत, बदले का भाव, कठोरता भी कभी-कभी साथ रहते हुए अपने या गैरों से ही सीखते हैं, क्योंकि वे मजबूर कर देते हैं सताकर, रुलाकर, बेवजह यातना देकर। हर कोई सिर्फ बुरा नहीं होता, उन्हें परिस्थिति बना देती है। अपने हर पल से, हर किसी से सबक मिलता है। कहाँ, कब, किससे कैसे व्यवहार करना, किससे बचकर रहना, कौन मतलबी है, धोखा दे सकते हैं, कौन काम निकालते हैं, कौन निभाते हैं, वक्त पर साथ देते हैं या नहीं, किसका स्वभाव, नियत कैसे है? यह हम उनके साथ रहकर, उनसे बात करके वक्त के साथ सीखते हैं। अलग-अलग माहौल में रहने वाले लोगों के साथ हम विभिन्न कला, संस्कृति और परंपरा को जानते हैं। इसलिए कभी किसी मोड़ पर किसी के व्यवहार से मन दुखे, कोई छल-कपट, षड्यंत्र करे या ताना दे, मनमुटाव हो जाए, बहस-विवाद हो तो उसे मन में भरकर मत रखिए। हर किसी की अच्छी बातों को ग्रहण कीजिए। नाराज मत रहिए, खुश रखिए और रहने दीजिए। बुरे विचार को जितनी जल्दी हो त्याग दीजिए। विनम्र रहिए और किसी की जिंदगी में बेवजह दखल मत दीजिए। कुछ नया सीखें और करें। हर किसी की सुनें, उनके विचारों का सम्मान करें, इससे हमें लाभ ही मिलता है। एक कोने में सिमट कर बैठ जाने से किसी कठिनाई को हल नहीं कर सकते। इसलिए आपसी चर्चा, चिंतन जरूरी है। हर तरह के लोगों से मिलकर अनुभव जिंदगी का लेते रहिए, कोई भी सीख व्यर्थ नहीं होती। जिंदगी के बारे में सोचते रहेंगे और कुछ नहीं करेंगे, प्रयास नहीं करेंगे तो जीने के अवसर खत्म होते जाएंगे और एक दिन हम यूं ही बिना जिए इस संसार से चले जाएंगे। पर सोचिए! आए हैं तो कुछ करके जाएं, जो भी पल है उसे भरपूर आनंद लें। क्या होगा ये तो नहीं जानते, लेकिन क्या करना है ये तय अवश्य कीजिए। जब हम अपने भूत, भविष्य और वर्तमान के प्रति लापरवाह होते हैं, तब ही दुख बेवजह पाते हैं। जो दर्द से भरे होते हैं उन्हें सांत्वना, स्नेह-दुलार, अपनेपन की जरूरत होती है। लेकिन अक्सर जो अपने और भाग्य से सताए हुए होते हैं, उन्हें ही अधिक भावनात्मक चोट मिलती है, जिससे वे खामोश, भयभीत और दहशत में होते हैं। ऐसे लोगों का सहयोग कीजिए, मानसिक खुशी दीजिए। किसी प्रकार का तनाव मत लीजिए, हर कोई इस जिंदगी में अपने अनुसार अपनी भूमिका का निर्वहन करता है। गिरते-संभलते हैं और सीखते हैं। इसलिए हर पल को बिना किसी चिंता के गुजारिए, दिल से आनंदित रहिए, यही जीवन है, जो देखते ही देखते गुजर जाएगी, फिर लौटकर न आएगी।







