सौजन्य: डॉ.यल.कोमुरा रेड्डी
(असिस्टेंट प्रोफ़ेसर आफ हिंदी)
करीमनगर, तेलंगाना
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
डिजिटल युग में हिन्दी के लिए खुले हैं
विकास और रोजगार के नए द्वार।
हिन्दी पखवाड़ा समारोह में
प्राचार्य प्रो. के. रामकृष्ण का संबोधन
हिन्दी भारतीय भाषाओं के बीच संवाद
और समन्वय की सशक्त कड़ी
: आचार्य वासाला वरप्रसाद
करीमनगर: श्री राजा राजेश्वरा स्नातक महाविद्यालय (स्वायत्त), करीमनगर में हिन्दी विभाग के तत्वावधान में आयोजित हिन्दी पखवाड़ा समारोह प्राचार्य प्रो. के. रामकृष्ण की अध्यक्षता में उत्साहपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. के. रामकृष्ण ने कहा कि डिजिटल क्रांति ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार, विकास और वैश्विक विस्तार के लिए नए द्वार खोल दिए हैं। आज हिन्दी पारंपरिक साहित्य और सामान्य संवाद की भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान-विज्ञान, तकनीकी संचार, डिजिटल पत्रकारिता, ऑनलाइन शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुवाद तथा रोजगार के उभरते क्षेत्रों में भी अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज करा रही है।
प्राचार्य ने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के व्यापक प्रसार ने हिन्दी को नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर हिन्दी में उपलब्ध सामग्री लगातार बढ़ रही है। ऑनलाइन शिक्षा, ई-कंटेंट निर्माण, डिजिटल मीडिया, ब्लॉगिंग, अनुवाद, वॉयस टेक्नोलॉजी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में हिन्दी के जानकार युवाओं के लिए नए अवसर विकसित हो रहे हैं। इसलिए विद्यार्थियों को हिन्दी भाषा के ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी कौशल भी अर्जित करना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि भाषा को केवल परीक्षा का विषय न मानकर ज्ञान, अभिव्यक्ति और रोजगार का माध्यम बनाना चाहिए। हिन्दी में प्रभावी लेखन, शुद्ध एवं स्पष्ट अभिव्यक्ति, अनुवाद कौशल और डिजिटल तकनीक के उपयोग की क्षमता विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा दे सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भाषा और तकनीक का समन्वय युवाओं के लिए अनेक नए अवसरों का निर्माण कर रहा है।
प्रो. के. रामकृष्ण ने यह भी कहा कि हिन्दी भारतीय भाषाओं के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत की भाषायी विविधता हमारी विशेष पहचान है और सभी भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान रखते हुए उनके बीच संवाद और समन्वय को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय भाषाओं और संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का आग्रह किया।
प्राचार्य ने हिन्दी पखवाड़ा समारोह के आयोजन की सराहना करते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. यल. कोमुरा रेड्डी को कार्यक्रम के सुव्यवस्थित आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और साहित्यिक चेतना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आचार्य वासाला वरप्रसाद ने अपने विशेष व्याख्यान में कहा कि “हिन्दी भारतीय भाषाओं की संवाहिका है।” उन्होंने कहा कि हिन्दी देश की विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और विचारधाराओं के बीच संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने डिजिटल युग में हिन्दी के बढ़ते महत्व तथा रोजगार की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से हिन्दी के साथ आधुनिक तकनीकी कौशल विकसित करने का आह्वान किया।
हिन्दी पखवाड़ा समारोह के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए निबंध लेखन, कविता वाचन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों द्वारा प्रमाणपत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में कनिष्ठ प्राध्यापक श्री कनकय्या, श्रीमती सुनीता तथा विवेकानंद महाविद्यालय के डॉ. एम.डी. अली खान उपस्थित रहे। महाविद्यालय की IQAC समन्वयक डॉ. हरजोत कौर, तेलुगु विभागाध्यक्ष डॉ. बुर्ला चंद्रशेखर सहित अन्य शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

हिन्दी पखवाड़ा समारोह ने विद्यार्थियों में हिन्दी के प्रति रुचि और भाषायी चेतना को बढ़ाने के साथ-साथ डिजिटल युग में हिन्दी को ज्ञान, तकनीक और रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता का संदेश दिया। समारोह का समापन उत्साहपूर्ण एवं गरिमापूर्ण वातावरण में हुआ।






