शब्दवीणा के मंच पर अल्पना सिंह रचित मर्यादा,पिया बसंती रे और तुमसे मिलकर उपन्यासों का हुआ लोकार्पण।

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सौजन्यः कवि संगम त्रिपाठी

 

                 (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)                                               (w) 6395080071

 

शब्दवीणा के मंच पर अल्पना सिंह रचित मर्यादा,

पिया बसंती रे और तुमसे मिलकर उपन्यासों का हुआ लोकार्पण।

 

    जबलपुर/औरंगाबादः  जिला मुख्यालय के ब्लॉक मोड़ के समीप अवस्थित पृथ्वीराज चौहान स्मृति भवन के प्रांगण में राष्ट्रीय साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्था शब्दवीणा के मंच पर उपन्यास लेखिका अल्पना सिंह रचित मर्यादा, तुमसे मिलकर और पिया बसंती रे उपन्यासों का लोकार्पण किया गया। शब्दवीणा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह संस्थापक प्रोफेसर डॉ रश्मि प्रियदर्शनी के दिग्दर्शन में जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में लोकार्पण समारोह का उद्घाटन बिहार प्रदेश महोत्सव संघ के अध्यक्ष महोत्सव रत्न संजीव कुमार सिंह, प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ हनुमान राम,गणितज्ञ डॉ शिवपूजन सिंह, पर्यावरणविद् डॉ रामाधार सिंह,माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामभजन सिंह,जेएलएन कॉलेज डेहरी के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर विजय कुमार सिंह, जम्होर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि प्रदीप कुमार सिंह, पृथ्वीराज चौहान ट्रस्ट के दोनों कार्यकारी अध्यक्ष जगदीश सिंह एवं रामप्रवेश सिंह, राष्ट्रीय उद्घोषक आफताब राणा,अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह, साहित्य कुंज के केंद्रीय महासचिव अरविंद अकेला, राष्ट्रीय कवि स्पर्श मंच के अध्यक्ष श्रीराम राय,राज्य महोत्सव संघ के महिला प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष श्वेता सिंह, डॉ रविंद्र कुमार, इंजीनियर श्रवण कुमार सिंह पूर्व शिक्षा पदाधिकारी सुमन अग्रवाल, अष्टभुजी धाम के संरक्षक अजीत मिश्रा,संज्ञा समिति के अध्यक्ष अशोक पांडेय एवं अन्य लोगों के द्वारा किया गया। संचालन की जिम्मेवारी शब्दवीणा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेश विद्यार्थी ने निभाई। अल्पना सिंह द्वारा लोकार्पण के संदर्भ में विषय प्रवेश किया गया‌।अपनी तीनों रचनाएं मर्यादा, पिया बसंती रे, तुमसे मिलकर उपन्यास पर विस्तृत चर्चा की गई। लेखिका ने बताया कि उन्हें लिखने की प्रेरणा अपने आसपास के वातावरण एवं नारियों की जो वर्तमान समस्याएं हैं उन्हें देखकर मिली, उनके मन में संवेदना जगी और लेखनी के माध्यम से उसे आमजन के सामने प्रस्तुत करने का कार्य की। प्रदीप कुमार सिंह ने पाठक वर्ग की समस्या पर चर्चा किया तो प्रोफेसर विजय कुमार सिंह ने उपन्यास में नारी के अंतर्मन की विवेचना की। डॉ. हनुमान राम ने कहा कि समाज के वर्तमान परिदृश्य ही किताबों में झलकती है। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि पुस्तक लिखना एक दुरुह कार्य है। अल्पना सिंह ने इस दुरुह कार्य को सुलभ करते हुए उपन्यास के माध्यम से नारी सशक्तिकरण को चित्रित करने का कार्य किया है। मौके पर आगत अतिथियों को अंग वस्त्र पुष्प हार, प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। मौके पर मनोरमा देवी, आयुषी कुमारी, सुबोध कुमार पांडेय, वेद प्रकाश पांडेय, विकास कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, शिक्षक नवीन कुमार, राजेश रंजन,सिंहेश सिंह, अशोक कुमार सिंह, कुमार विपिन, सत्यचंडी धाम के राजेंद्र सिंह एवं अमरेश सिंह, ओम प्रकाश शर्मा जनार्दन मिश्र जलज, चंद्रकांत सिंह, सुरेश ठाकुर, गगन गुप्ता ओम प्रकाश पांडेय, सुरेंद्र वैद्य, सहित अन्य उपस्थित थे। इस सफल आयोजन की कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बधाई दी।

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