सौजन्यः बीएल भूरा चन्द्र शेखर आजाद नगर भाबरा, मध्य प्रदेश
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड (w) 6395080071
गांव रूपाखेड़ा के युवा भरत चोपड़ा ने लंदन से मास्टर डिग्री प्राप्त कर पटेलिया समाज और झाबुआ जिले का बढ़ाया मान।
झाबुआ जिले के छोटे से गांव रूपाखेड़ा के युवा भरत चोपड़ा ने अपने संघर्ष, कड़ी मेहनत और परिवार के अटूट सहयोग के बल पर लंदन (यूनाइटेड किंगडम) से अपनी मास्टर डिग्री सफलतापूर्वक पूर्ण कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे पटेलिया समाज और झाबुआ जिले का गौरव बढ़ाया है।
भरत चोपड़ा का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही उनके पिता स्वर्गीय छगन चोपड़ा का निधन हो गया। इसके बाद उनकी माता श्रीमती कला के पुनर्विवाह के पश्चात उन्हें एक नया परिवार मिला, जिसने उन्हें केवल अपनाया ही नहीं, बल्कि हर कदम पर पिता का स्नेह, माँ का वात्सल्य और बड़े भाई का मार्गदर्शन दिया।
भरत के जीवन में सोमसिंह रोझ ने पिता के समान संरक्षण दिया, जबकि माता कला रोझ ने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया। उनके बड़े भाई विनोद रोझ ने सदैव मार्गदर्शक बनकर साथ दिया और अलका रोझ ने भाभी ही नहीं, बल्कि माँ के समान स्नेह, प्रेरणा और सहयोग प्रदान किया। परिवार के इसी प्रेम, विश्वास और समर्थन ने भरत को अपने सपनो को साकार करने की शक्ति दी।
विदेश में पढ़ाई के दौरान भरत ने केवल शिक्षा पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी करके अपने दायित्वों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन किया। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने धैर्य, अनुशासन और अथक परिश्रम के बल पर अपनी मास्टर डिग्री पूरी की।
भरत चोपड़ा की यह सफलता उन हजारों ग्रामीण और आदिवासी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को छोटा मान लेते हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि यदि व्यक्ति में दृढ़ संकल्प, मेहनत और परिवार का सहयोग हो, तो दुनिया का कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
आज भरत चोपड़ा ने न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे पटेलिया समाज, झाबुआ जिले और अपने गांव रूपाखेड़ा का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। समाज के लोगों ने उनकी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे युवा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनते हैं और शिक्षा के माध्यम से समाज को आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं।
भरत चोपड़ा की यह उपलब्धि इस बात का जीवंत उदाहरण है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि परिवार का साथ और स्वयं पर विश्वास हो, तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है।
“गांव का बेटा जब दुनिया में अपनी पहचान बनाता है, तो उसकी सफलता केवल उसकी नहीं, पूरे समाज की जीत बन जाती है।”






