संवाददाता कानपुरः अवधेश प्रताप सिंह
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, दुनिया के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण CEOs में से एक को चीन ने अपने खुफिया ऑपरेशन के जरिए निशाना बनाया है। यह CEO कोई और नहीं, बल्कि Nvidia के मालिक जेनसन हुआंग हैं।
अमेरिकी एजेंसियां कई महीनों से एलिस हुआंग नाम की एक चीनी कारोबारी महिला पर नजर रख रही थीं। उसे हुआंग ली के नाम से भी जाना जाता है। इस महिला ने एशिया में कई बिजनेस मीटिंग, डिनर और कारोबारी मुलाकातों के जरिए Nvidia के CEO जेनसन हुआंग से अच्छी पहचान बना ली थी। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों को शक होने लगा कि यह महिला जेनसन हुआंग के जरिए मिलने वाली जानकारी चीन की सरकार तक पहुंचा रही है।
अब सवाल है कि आखिर जेनसन हुआंग इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?
दरअसल, जेनसन हुआंग Nvidia कंपनी चलाते हैं। यह वही कंपनी है जो आज दुनिया में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए सबसे जरूरी और ताकतवर चिप्स बनाती है। दुनिया के सबसे एडवांस्ड AI सिस्टम इन्हीं चिप्स की मदद से काम करते हैं। यानी आज अमेरिका और चीन के बीच AI की जो बड़ी लड़ाई चल रही है, उसमें Nvidia की बहुत बड़ी भूमिका है।
अमेरिका पिछले कई सालों से कोशिश कर रहा है कि Nvidia की सबसे ताकतवर चिप्स चीन तक न पहुंचें। इसके लिए अमेरिकी सरकार ने चीन पर कई तरह की पाबंदियां भी लगा रखी हैं। लेकिन दूसरी तरफ जेनसन हुआंग लगातार अमेरिकी सरकार से यह मांग करते रहे हैं कि Nvidia को चीन में ज्यादा चिप्स बेचने की इजाजत दी जाए।
ऐसे में अगर चीन को जेनसन हुआंग के जरिए कंपनी की अंदरूनी जानकारी मिल जाती, तो उसके लिए यह बहुत बड़ी बात होती। चीन को पता चल सकता था कि Nvidia आगे क्या रणनीति बना रही है, अमेरिकी सरकार चीन को चिप्स बेचने के मामले में क्या सोच रही है और Nvidia पर्दे के पीछे अमेरिकी सरकार पर किस तरह का दबाव बना रही है।
इस महिला का संबंध सिंगापुर की MegaSpeed International नाम की एक डेटा सेंटर कंपनी से भी बताया गया है। यह कंपनी पहले से ही अमेरिकी जांच एजेंसियों के शक के घेरे में थी। अमेरिका को शक था कि कहीं यह कंपनी Nvidia की ताकतवर कंप्यूटिंग चिप्स को अमेरिकी पाबंदियों से बचाकर चीन के ग्राहकों तक तो नहीं पहुंचा रही है।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी इस खुफिया जानकारी के बारे में बताया गया था। इसके बावजूद उन्होंने इस मामले में दखल नहीं दिया।
इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि ट्रंप Nvidia को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे। उन्हें डर था कि इस मामले में कार्रवाई करने से कंपनी के शेयरों की कीमत गिर सकती है और चीन के साथ चल रही बातचीत पर भी असर पड़ सकता है।
और तो और, खुद जेनसन हुआंग को कभी आधिकारिक तौर पर यह चेतावनी भी नहीं दी गई कि उनके करीब रहने वाली इस महिला पर चीन के लिए जासूसी करने का शक है और अमेरिकी एजेंसियां उस पर नजर रख रही हैं।
हालांकि, Nvidia का कहना है कि उस महिला के साथ उसका रिश्ता सिर्फ सामान्य कारोबारी बातचीत और मुलाकातों तक ही था। कंपनी का दावा है कि उसके साथ कोई भी गोपनीय या संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की गई। वहीं, चीन ने इस पूरी खबर को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए खारिज कर दिया है।
लेकिन इस पूरे मामले से एक बात समझने वाली है। अमेरिका और चीन के बीच चल रही लड़ाई अब सिर्फ मिसाइलों, ताइवान या व्यापार तक सीमित नहीं रह गई है। अब यह लड़ाई दुनिया की सबसे ताकतवर चिप्स, बड़ी टेक कंपनियों के मालिकों, उनके कारोबारी रिश्तों और खुफिया जानकारी हासिल करने तक पहुंच चुकी है।
और अगर वाकई चीन अपने किसी खुफिया एजेंट को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण AI चिप कंपनी के CEO के इतने करीब पहुंचाने में कामयाब रहा, तो यह सिर्फ किसी कारोबारी को अपने जाल में फंसाने का मामला नहीं है। यह सीधे तौर पर अमेरिका की तकनीकी ताकत के सबसे बड़े केंद्र पर हमला करने जैसा है।
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