नवीन डिमरी ‘बादल’
‘सरस्वती सदन’, डिम्मर (सैण)
सिमली, चमोली (उत्तराखंड)
(नया अध्याय, देहरादून)
गजल
चार दिनों का है ये जीवन यार मियां,
छोड़ तू नफरत, सबसे करले प्यार मियां।
लूट-डकैती न करें तो क्या खाएँ!
पढ़े-लिखे सब हैं बेरोजगार मियाँ।
अंधों की झोली में सिक्के खोटे डाल,
लोग दिखावे को करते हैं सत्कार मियाँ।
ज्यादा घुलना-मिलना भी तो ठीक नहीं,
उठती है फिर नफरत की दीवार मियाँ।
यूँ लगता है तेरी औरत पेट से है,
वरना खाती इतना क्यों अचार मियाँ।
सच सुनने को आज कोई तैयार नहीं,
अब झूठों को देते हैं सब प्यार मियाँ।
आज सुना है वह बिकने को आया था,
लेकिन यहां तो बंद है सब बाजार मियाँ।
रिश्तों को भी ‘बादल’ बिकते देखा है,
होता है अब प्यार का भी व्यापार मियाँ।
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